रवीश कुमार, वरिष्ट पत्रकार

नई दिल्ली | एनडीटीवी के मशहूर एंकर और पत्रकार रविश कुमार ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कुछ मीडिया चैनल पर निशाना साधा है. रविश ने इन चैनल को गुलाम बताते हुए कहा की विडंबना यह है की जिस चैनल पर हम आजादी का जश्न देख रहे है वो खुद आजाद नही है. इसलिए मीडिया को आजाद करने के लिए एक बार फिर आजादी की लड़ाई लड़नी पड़ेगी. रविश कुमार ने गोरखपुर में हुए हादसे पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा की बच्चो की मौत के बाद भी ये चैनल गीता में उलझे रहे.

रविश कुमार ने 15 अगस्त के दिन अपने फेसबुक पेज पर एक भाषण पोस्ट किया. उनके अनुसार जिस तरह नेता, मंत्री और प्रधानमंत्री इन मौको पर भाषण देते है उसी तरह आम जनता को भी अपना भाषण शेयर करना चाहिए. मैं कर रहा हूँ. रविश ने अपने भाषण की शुरुआत में ही सरकार और नेताओं पर झूठ बोलने का आरोप लगाय. उन्होने कहा की 15 अगस्त सिर्फ 15 अगस्त में नही है, यह उन तमाम संघर्षो में है जो आजाद भारत के स्वप्न को जिन्दा रखने के लिए किये जा रहे है.

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गोदी मीडिया पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा की गोदी मीडिया की लरजती जबान बता रही है की हमारी इस आजादी को किसी की नजर लग गयी है. एक न एक दिन हम इस गोदी मीडिया से आजादी के संघर्ष में सडको पर उतरेंगे, आजादी की सबसे बड़ी निशानी ही आजाद नही है. इन मीडिया हाउस के एंकर पर निशाना साधते हुए रविश ने कहा की ये जो सूट में एंकर दिख रहे हैं वो हमारी आज़ादी के घटते स्तर हैं. बच्चों की मौत पर भी वो गीतों के राग में उलझे रहे.

रविश ने गोदी मीडिया पर और आक्रमक होते हुए कहा की गोदी मीडिया हर भारतीय के लिए दैनिक शर्म का प्रतीक है. आपको जागना ही होगा. वरना एक दिन आपका भी गला घोंटा जाएगा और गोदी मीडिया किसी और के गीत में मशगूल हो जाएगा. जो बाहर से दिख रहा है उसकी ये हालत है तो अंदाज़ा कीजिए अंदर क्या हालात होंगे. डरपोकों की जमात पैदा हो रही है जो बोलने पर धावा बोलती हैं. एक अरब की आबादी वाले बेमिसाल मुल्क हिन्दुस्तान के ये पांच पचीस एंकर ग़ुलाम हो चुके हैं.

पढ़िए आगे क्या लिखा है रविश कुमार ने  

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