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कथित तौर पर अयोध्या विवाद को सुलह-समझौते से हल करने के लिए आगे आए आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर पर गंभीर आरोप लग रहे है. पूर्व बीजेपी सांसद ने उन पर बेनामी संपति बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जांच से बचने के लिए वे इस विवाद में कूदे है.

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद और धार्मिक गुरु राम विलास वेदांती ने कहा है कि श्री श्री रविशंकर मध्यस्ता करने वाले कौन होते हैं, उन्हें अपना एनजीओ चलाते रहना चाहिए. वेदांती ने कहा, श्री श्री रविशंकर मध्‍यस्‍थता करने वाले कौन होते हैं हैं? उन्हें अपना एनजीओ चलाना चाहिए और विदेशी फंड को जमा करना चाहिए.

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उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि उन्होंने खूब संपत्ति बना ली है और उसकी जांच से बचने के लिए वे राम मंदिर विवाद में कूद पड़े हैं. इसी के साथ निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख ने उन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड से 20 करोड़ रुपए की डील करने का आरोप लगाया है.

महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि विवादिन जमीन से अपना दावा छोड़ने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड से 20 करोड़ रुपए की डील हो रही है. वहीँ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य एजाज अरशद कासमी ने रविशंकर से मुलाकात करने के बाद कहा कि रविशंकर चाहते हैं कि मुस्लिम इस विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ दें.

उन्होंने कहा, अभी तक श्री श्री ने समझौते का कोई भी मॉडल पेश नहीं किया है। मॉडल पेश होगा, तभी को बातचीत होगी.

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