राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां जोरो-शोरों से रणनीति बनाने में जुटी हैं। लेकिन इस बार मुस्लिमों को राजनीति में हाशिये पर डालने की कोशिश हो रही है। बीजेपी पहले ही गिनती के मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देती आई है। लेकिन कांग्रेस भी सॉफ्ट हिन्दुत्व की राजनीति के तहत ऐसा ही करने जा रही है।

2013 में कांग्रेस ने 15 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था, लेकिन कोई भी उम्मीदवार नहीं जीत सका। अब पार्टी का कहना है कि इस बार टिकट के बंटवारे में सिर्फ और सिर्फ इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि जीतने वाले उम्मीदवार को ही टिकट मिले।

कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल के अध्यक्ष निजाम कुरैशी का कहना है कि मुस्लिम समुदाय इस बार कांग्रेस से 15 से 20 टिकट चाहता है। उनका कहना है कि मुस्लिम और भागीदारी चाहतेे हैं। अगले 15 दिनों में हम स्टेट लेवल अल्पसंख्यक कॉन्क्लेव करने जा रहे हैं। इसमें हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि कहां-कहां हम जीत की स्थिति में हैं।

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कुरैशी का कहना है कि राज्य में मुस्लिमों की आबादी 9.1 प्रतिशत है। जैसलमेर (25.1%) अलवर (14.9%) भरतपुर (14.5%) और नागपुर में 13.7 % मुस्लिम आबादी ज्यादा है इन जिलों में कांग्रेस मुस्लिम उम्मीदवार उतार सकती है।

उन्होने बताया, इसके अलावा सीकर, चूरू और झुंझुनू में भी मुस्लिम कुछ सीटों पर निर्णायक हैं। 2008 में कांग्रेस ने मुस्लिमों को 14 टिकट दिए थे। इनमें से 10 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी।

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