अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता पर दिए गए बयान पर लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी पीएम पर निशाना साधा है।

राहुल गांधी ने सोमवार को कहा, ”ट्रम्प ने कहा कि मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने को कहा था, अगर यह सच है तो प्रधानमंत्री ने भारत के हितों और 1972 शिमला समझौते के साथ विश्वासघात किया।” राहुल ने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय के कमजोर इनकार से काम नहीं चलेगा, प्रधानमंत्री को देश को बताना होगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके बीच हुई बैठक में क्या हुआ?

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद की अगुवाई में विपक्षी दलों के नेताओं ने मंगलवार को संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि ट्रंप ने अपने कथित बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र किया है। ऐसे में मोदी को खुद संसद के दोनों सदनों में बयान दे कर स्थिति स्पष्ट करना चाहिये।

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi gestures as he speaks at a function to launch the MSME Support and Outreach Programme, in New Delhi, Friday, Nov 2, 2018. (PTI Photo/Kamal Kishore) (PTI11_2_2018_000134B)

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के माजिद मेनन ने कहा, ‘‘यह बात हमारी समझ से परे है कि प्रधानमंत्री को दोनों सदनों में बयान देने के हमारे अनुरोध को स्वीकार करने में आखिर क्या परेशानी है ?’’ राजद के मनोज झा ने कहा, ‘‘ट्रंप ने अपने बयान में किसी अधिकारी या अन्य नेता का नहीं बल्कि सीधे तौर पर प्रधानमंत्री का जिक्र किया है। ऐसे में कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर प्रधानमंत्री को स्थिति स्पष्ट करने से बचना नहीं चाहिये। कुछ तो है जिसकी पर्दादारी है।’’

आप के संजय सिंह ने कहा, ‘‘ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मौजूदगी में कहा है कि मोदी ने उनसे मध्यस्थता का अनुरोध किया है। इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें मध्यस्थता करने में खुशी होगी। यह भारत की संप्रभुता के खिलाफ कही गयी बात है। मोदी जी के संदर्भ में कही गयी बात है इसलिये संसद का सत्र चल रहा है, ऐसे में प्रधानमंत्री को (संसद के) दोनों सदनों में स्पष्टीकरण देना चाहिये।’’

ऐसे में विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर सफाई दी और कहा कि ‘वह सदन में यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि पीएम मोदी द्वारा ऐसा कोई निवेदन नहीं किया गया है।’ एस.जयशंकर के अनुसार, ‘भारत का यह लगातार स्टैंड रहा है कि पाकिस्तान के साथ के सभी मुद्दे ‘द्विपक्षीय’ बातचीत के द्वारा ही हल किए जाएंगे और बातचीत के लिए पाकिस्तान को पहले सीमापार से आने वाले आतंकवाद पर रोक लगानी होगी।’

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