शनिवार को दुबई के आईएमटी यूनिवर्सिटी में प्रवासी भारतीय छात्रों से संवाद के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि पिछले साढ़े चार सालों में भारत में असहिष्णुता का माहौल रहा। इस दौरान देश में जो माहौल रहा वह बिलकुल भी ठीक नहीं था। ऐसे में देश को कैसे एकजुट किया जाए इस पर जोर देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हम ऐसा भारत नहीं चाहते, जहां पत्रकारों को गोली मारी जाती है और लोगों को अपनी बात कहने पर पीटा जाता है। आगामी चुनाव में यही असली चुनौती है।” प्रवासी भारतीय छात्रों से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “जब आप विदेश में रहते हैं, तो आप अपने देश के राजदूत बन जाते हैं। भारत जैसे देश के लिए इसका बहुत महत्त्व है। अगर भारत अवसर प्रदान करता है, तो लोग वापस आएंगे। अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह ‘ब्रेन ड्रेन’ समस्या है।” उन्होंने कहा कि भारत नौकरी की कमी और कृषि से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहा है। दोनों परेशानियों को दूर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हमें यूरोप से सीखने की जरूरत है, वहां से आइडिया लेने की जरूरत है। हमें 10-15 बड़ी कंपनियों पर ध्यान देने की बजाय हजारों छोटे और मध्यम उद्यमियों को सशक्त बनाने की जरूरत है।” संवाद के दौरान एक छात्रा ने राहुल गांधी से सवाल पूछा कि भारत में शिक्षा व्यवस्था में कैसे बदलाव किया जाए ताकि छात्रों को और बेहतर शिक्षा मुहैया कराई जा सके। इसका जवाब देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान हमने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम किया। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली में कुछ बेहद ठोस विशेषताएं हैं और कुछ ऐसी हैं, जिनमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के समय छात्रों के नामांकन में भारी उछाल आया था। राहुल गांधी ने छात्रों के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कृषि भारत की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश में कृषि पर काफी काम करने की जरूरत है। राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी को बढ़ाने की वकालत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में अपना योगदान दे रही हैं, लेकिन लोकसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी को बढ़ाने की जरूरत है, जिसपर हम काम कर रहे हैं।

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