उत्तर प्रदेश के चिड़ियाघरों में शेरों और बब्बर शेरों को मीट के बजाय चिकन खिलाने पर शुक्रवार को कांग्रेस सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने शून्यकाल में ये मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि क्या अब शेरों को भी पालक पनीर खाने को कहा जाएगा ?

उन्होंने कहा कि भारत 28 हजार करोड़ रुपये मूल्य के मांस का निर्यात करता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के चिड़ियाघरों में शेर और बब्बर शेरों को मांस के बजाय चिकन खाने को दिया जा रहा है. सांसद ने कहा कि प्रकृति की एक जैविक व्यवस्था है जिसमें सभी का जिंदा रहना जरूरी है लेकिन अभी कहा जा रहा है कि मांस का उपभोग बंद कर देंगे.

दरअसल, प्रदेश में अवैध बूचड़खानों और मीट की दुकानों पर कार्रवाई के कारण चिड़ियाघर के शेरों और बाघों को भूखा रहना पड़ रहा हैं. पूर्व सीएम अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट रहे इटावा की लॉयन सफारी के लिए गुजरात से लाए गए शेर को रोजाना सफारी के अधिकारियों ने बताया कि इन शेरों को रोजाना 8-10 भैंसों का मांस चाहिए होता है.

यहां पर सात बाघ, चार सफेद बाघ, आठ शेर, आठ पैंथर, 12 जंगली बिल्लियां, दो लकड़बग्‍घे, दो भेडि़ए और दो सियार हैं. इनके लिए रोजाना 235 किलो मांस चाहिए होता है. ऐसे में चौधरी ने सरकार से सवाल किया, ‘ क्या अब शेर और बब्बर शेरों को भी कहा जाएगा कि पालक पनीर खाकर रहो ?

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