केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों का विरोध कर रही शिरोमणि अकाली दल ने NDA से 23 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया है। अकाली दल का अलग होना भाजपा के लिए एक बड़ा झटका है।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा, ‘‘शिरोमणि अकाली दल की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई कोर समिति की आपात बैठक में भाजपा नीत राजग से अलग होने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया।’’ इससे पहले राजग के दो अन्य प्रमुख सहयोगी दल शिवसेना और तेलुगु देशम पार्टी भी अन्य मुद्दों पर गठबंधन से अलग हो चुके हैं।

सुखबीर बादल ने एक ट्वीट में बताया है कि पार्टी एक अक्तूबर को पंजाब में बड़ा किसान मार्च करेगी और राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल को ज्ञापन सौपेंगी। इससे पहले विधेयक के विरोध में केंद्र सरकार में मंत्री हरसिमरत कौर ने भी पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।

अब उन्‍होंने ट्वीट कर कहा कि यदि तीन करोड़ पंजाबियों की पीड़ा और विरोध के बावजूद भारत सरकार का दिल नहीं पसीज रहा तो ये वो एनडीए नहीं है जिसकी कल्‍पना अटल बिहारी वाजपेयी और प्रकाश सिंह बादल ने की थी। ऐसा गठबंधन जो अपने सबसे पुराने सहयोगी की बात नहीं सुनता और पूरे देश का पेट भरने वाले वालों से नजरें फेर लेता है तो ऐसा गठबंधन पंजाब के हित में नहीं है।

मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि बादल परिवार के पास एनडीए से अलग होने के अलावा और कोई विकल्प नहीं रह गया था। उन्होंने कहा, ‘अकाली दल के एनडीए से अलग होने में कोई नैतिकता नहीं है। बीजेपी नेताओं के उन पर कृषि अध्यादेशों को लेकर किसानों को समझाने में नाकाम रहने के आरोप लगाने के बाद उनके पास एनडीए को छोड़ने के अलावा और कोई विकल्प रह भी नहीं गया था।’

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