भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय जाने और भारतीय राष्ट्रवाद पर विचार व्यक्त करने को देश के समसामयिक इतिहास की ‘‘महत्वपूर्ण घटना’’ करार दिया।

आडवाणी ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के भाषण से निश्चित तौर पर देश में सहिष्णुता, सौहार्द और सहयोग का माहौल बनाने में मदद मिलेगी। आडवाणी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निमंत्रण स्वीकार करने के लिए प्रणब मुखर्जी और उन्हें आमंत्रित करने के लिये सरसंघचालक मोहन भागवत की सराहना की।

आडवाणी ने कहा कि दोनों के भाषणों में सामंजस्‍य और जीवंतता साफ नजर आ रही थी। उन्‍होंने कहा कि मुखर्जी और भागवत ने वैचारिक मान्‍यताओं और मतभेदों से ऊपर उठकर संवाद का सराहनीय उदाहरण पेश किया है।

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अपने बयान में आडवाणी ने कहा, ‘दोनों ने भारत की एकता को रेखांकित किया, जो सभी विविधताओं और आस्‍थाओं की बहुलता को स्‍वीकारती और सम्‍मान करती है।’ उन्‍होंने भागवत के नेतृत्‍व में आरएसएसके विस्‍तार और संवाद की भावना में देश के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचने के प्रयास में तेजी पर खुशी जताई।

आडवाणी ने कहा, “खुलेपन और आपसी आदर के जरिए इस तरह के संवाद से हमारे सपनों के भारत के लिए बहुत जरूरी सहिष्‍णुता का माहौल, सद्भाव और सहयोग का माहौल बनाने में मदद मिलेगी।”

प्रणब मुखर्जी की सराहना करते हुए आडवाणी ने कहा कि उन्होंने आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार करके विनम्रता और सदाचार का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे और व्यापक अनुभव ने उन्हें एक राजनेता बनाया है जो विभिन्न विचारधाराओं और राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों के बीच चर्चा परिचर्चा एवं सहयोग की जरूरत को समझता है

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