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लखनऊ: देश में दलितों की हालत का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है. जब एक दलित विधायक सूबे के मुखिया के पास शिकायत लेकर पहुंचा तो उसे डांट कर भगा दिया गया.

इस बात का खुलासा दलित सांसद छोटेलाल खरवार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र लिखकर में हुआ है. खरवार ने अपनी चिट्ठी में यूपी प्रशासन द्वारा उनके घर पर जबरन कब्जे और उसे जंगल की मान्यता देने की शिकायत की.

45 साल के सांसद ने लिखा है कि उन्होंने योगी आदित्यनाथ से दो बार मुलाकात की लेकिन उन्होंने मदद की बजाय बेइज्जत किया. बीजेपी सांसद ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्होंने सपा के गुंडाराज (शासनकाल) में अपने खास भाई जवाहर खरवार को चंदौली जिले के नौगढ़ ब्लॉक के प्रमुख पद पर बीजेपी उम्मीदवार के रूप में जितवाया था लेकिन जब राज्य में बीजेपी की सरकार आई तो पार्टी सांसद के ही भाई को साजिशन ब्लॉक प्रमुख पद से हटवा दिया गया.

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छोटेलाल ने पीएम को लिखी चिट्ठी में दो शिकायतें की है. पहली शिकायत में कहा है कि प्रदेश में जब अखिलेश सरकार थी, उस समय 2015 में नौगढ़ वन क्षेत्र में अवैध कब्जे की शिकायत मुख्यमंत्री समेत कई लोगों से की, लेकिन कार्रवाई की बजाय अधिकारियों ने मेरे घर को ही वन क्षेत्र में डाल दिया. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के आदेश पर दोबारा पैमाईश में सच सामने आया कि मेरा घर वन क्षेत्र में नहीं है.

दूसरा मामला

दूसरा मामला प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद का है. सांसद ने कहा कि अक्टूबर 2017 में मेरे भाई ( क्षेत्र पंचायत नौगढ़ का प्रमुख ) के खिलाफ सपा की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. इसके बाद वोटिंग के दौरान असलहों से लैस अपराधी तत्व के लोगों ने मेरी कनपटी पर रिवॉल्वर तान दी, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर धमकी और दी गाली दी, उस समय अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किया. इस मामले में पार्टी के लोग और पुलिस अधिकारी भी शामिल थे.