इस्लामिक सल्तनत के तहत मुग़ल काल में बनी विश्व प्रसिद्ध एतिहासिक इमारत लाल किले को ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ स्कीम के तहत डालमिया भारत ग्रुप को सौंप देने को लेकर मोदी सरकार पर विपक्ष भड़का हुआ है.

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने मोदी सरकार से सवाल किया कि क्या मोदी सरकार का यही न्यू इंडिया का आइडिया है. क्या धरोहर की देखभाल के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं. जो सरकार ऐतिहासिक धरोहर का निजीकरण कर रही है.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की आजादी के प्रतीक लाल किले को कॉरपोरेट के हाथों बंधक रखने की तैयारी कर रहे हैं. क्या मोदीजी या भाजपा लालकिले का महत्व समझती है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘क्या यह सच नहीं है कि यह निजी कंपनी लाल किला देखने के लिए टिकट जारी करेगी. क्या यह सच नहीं है कि यदि कोई वहां वाणिज्यिक गतिविधि या कोई कार्यक्रम करना चाहता है तो निजी पार्टी को भुगतान करना होगा.’’ सुरजेवाला ने कहा, ‘‘क्या आप लाल किला जैसे स्वतंत्रता आंदोलन के प्रतीक को रखरखाव के लिए अपने कोरपोरेट दोस्तों को दे सकते हैं?’’

delhi red fort

राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा इसे लाल किले का निजीकरण करना कहोगे, गिरवी रखना कहोगे या बेचना.अब पीएम का स्वतंत्रता दिवस का भाषण भी निजी कंपनी के स्वामित्व वाले मंच से होगा. ठोको ताली. जयकारा भारत माता का!

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, ‘‘क्या सरकार हमारे ऐतिहासिक लालकिले की देखभाल भी नहीं कर सकती? लालकिला हमारे राष्ट्र का प्रतीक है. यह ऐसी जगह है जहां स्वतंत्रता दिवस पर भारत का झंडा फहराया जाता है. इसे क्यों लीज पर दिया जाना चाहिए? हमारे इतिहास में निराशा और काला दिन है.’’

इसबीच, पर्यटन मंत्रालय ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि सहमति पत्र (एमओयू) लाल किला और इसके आस पास के पर्यटक क्षेत्र के रखरखाव और विकास भर के लिए है.  बयान में कहा गया है कि एमओयू के जरिए ‘गैर महत्वपूर्ण क्षेत्र’ में सीमित पहुंच दी गई है और इसमें स्मारक को सौंपा जाना शामिल नहीं है.


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