पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने ट्रिपल तालाक अध्यादेश को अत्याचारी कानून बताया है. उन्होंने कहा कि अत्याचारी कानून होने की वजह से यह बिल राज्यसभा में पास नहीं हो पाया.

उन्होंने कहा, यह अध्यादेश सिर्फ पति और पत्नी को अलग करता है, इसके अलावा कुछ भी नहीं है. हम इसे पूरी तरह अस्वीकार करते हैं क्योंकि यह एक अत्याचारी कानून है.

इसी के साथ उन्होंने कर्नाटक चुनाव में इस्लाम के नाम पर वोट मांगने की बात को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा,  ‘मैने विशेष रुप से मुसलमानों के लिए कोई सार्वजनिक बैठक नहीं की थी, यह सिर्फ एक जनसभा थी. मैं चुनौती देता हूं कि अगर चुनाव आयोग से मिलने वाले किसी भी व्यक्ति के पास इस्लाम के नाम पर वोट मांगने का मेरा वीडियो या ऑडियो है तो मैं संसद के सदस्य और विपक्ष के नेता के रुप में इस्तीफा दे दूंगा.’

गौरतलब है कि बीजेपी नेताओं ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि गुलाम नबी आजाद ने कर्नाटक में चुनावी रैली के दौरान धर्म के नाम पर वोट मांगा था. आजाद पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने कलबुर्गी में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि मुसलमानों को एकजुट होकर कांग्रेस के पक्ष में मतदान करना चाहिए. बीजेपी नेताओं का कहना था कि राज्यसभा सदस्य का यह बयान चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में है और इस पर चुनाव आयोग को एक्शन लेना चाहिए.

इन आरोपों पर गुलाम नबी ने कहा कि चुनाव आयोग में बीजेपी नेताओं ने उनके खिलाफ झूठी शिकायत की है. उन्होंने कहा, ‘मैं पिछले 40 सालों से चुनावी रैलीयां कर रहा हूं और भाषण दे रहा हूं लेकिन आजतक कभी धर्म के नाम पर मैंने वोट नहीं मांगा. मैंने कर्नाटक की चुनावी रैलियों में भी नफरत की बजाय प्यार का संदेश दिया. बीजेपी बस अफवाहों के सहारे हिंदू वोटरों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है.’


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