बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने दलितों के साथ हो रहे सामाजिक भेदभाव को लेकर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि दलित और पिछड़ा चुनाव और दंगों के वक़्त ही हिन्दू रहता है बाकि समय वह केवल नीच रहता है.

बीते दिनों गुजरात में हुई दलित युवक की हत्या का हवाला देते हुए मीसा ने कहा कि ”गुजरात में एक दलित युवक की इसलिए हत्या कर दी गई कि पाटीदार बहुल गाँव में घोड़े पर सवारी करने की हिम्मत की. उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित संजय कुमार और शीतल की शादी में उन्हें ठाकुर बहुल गाँव में बारात निकालने नहीं दिया जा रहा.

उन्होंने कहा, ये कौन से लोग हैं जो कानून और संविधान से भी ऊपर हैं? चुनाव और दंगों के वक़्त दलित पिछड़े हिन्दू मान लिए जाते हैं, पर बाकी समय दलित पिछड़े नीच बन जाते हैं. क्या दलितों के लिए कोई संविधान, कोई कानून नहीं?

मीसा ने आगे कहा, जब उत्तर प्रदेश के कासगंज में एक दलित परिवार ने बारात निकाल कर विवाह करना चाहा तो प्रशासन ने बारात के लिए रास्ता व नक्शा तय कर दिया! क्या यह विशेष व्यवहार कभी गैर दलितों के साथ किया गया है? और यह इसीलिए किया गया क्योंकि कुछ मनुवादी लोगों को दलितों के हँसते-गाते, खुशी मनाते चेहरे अपने घर के आगे गलियों में बर्दाश्त नहीं! उत्तर प्रदेश की सरकार जातिवाद और ऊँच नीच की भावना को क्यों चुप्पी साध हवा दे रही है?

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