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कांग्रेस के सीनियर लीडर और वरिष्ट वकील कपिल सिबल को पार्टी ने विवादित बाबरी मस्जिद केस में सुन्नी वक्फ बोर्ड की पैरवी छोड़ने का हुक्म सुनाया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सिब्बल से कहा गया कि इस केस से हाथ अपने खींचना ही राजनीतिक रूप से उनके लिए समझदारी भरा कदम होगा.

दरअसल, कांग्रेस को डर है कि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में विपक्ष को आड़े हाथों ले सकते हैं. जबकि सिब्बल कोर्ट और राजनीति में दोहरी भूमिका में हैं.

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस केस में सिब्बल की दलीलों को लेकर गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान मुद्दा बनाया था. सिब्बल ने अदालत से यह मांग की थी कि इस बेहद संवेदनशील बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई 2019 के आम चुनाव के बाद ही की जाए.

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जिसके बाद मोदी ने कहा था कि क्या सिब्बल का राम मंदिर को चुनावी राजनीति से जोड़ना सही है. सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से सुनवाई करने वाले सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि कोर्ट के फैसले का ‘बहुत गहरा असर’ होगा लिहाजा इस मामले की सुनवाई 2019 के चुनावों के बाद की जाए.

इस संबंध में आल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के सदस्‍य और वकील जफरयाब जिलानी ने द टाइम्‍स ऑफ इंडिया से कहा, ”संवैधानिक मसलों पर हमें बहस के लिए कपिल सिब्‍बल की जरूरत है. हालांकि केस की यह स्‍टेज बाद में आएगी और छह अप्रैल को अगली सुनवाई में फिलहाल ऐसा नहीं होने जा रहा है. फिलहाल राजीव धवन इस पक्ष से केस की पैरवी करेंगे.”

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