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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर विवाद शुरू हो गया है. एक तरफ बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने ये तस्वीर हटाने की मांग की है तो वहीँ कांग्रेस विधायक करण दलाल ने उन्हें  स्वतंत्रता सेनानी बताया है.

करण दलाल ने यहां तक कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने संयुक्त हिंदुस्तान (जब पाकिस्तान नहीं बना था) की आजादी को लेकर देश के अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ अंग्रेजों से आजादी दिलवाने में काफी अहम रोल निभाया था

उन्होंने कहा कि हालांकि जिन्ना से कुछ गलतियां भी हुईं जिस वजह से मुल्क का बंटवारा हो गया, लेकिन देश की यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे तमाम छात्र-छात्राओं ये पता लगना चाहिए कि मोहम्मद अली जिन्ना ने देश की आजादी के लिए किस तरह का अहम रोल निभाया, लेकिन बाद में उनकी गलतियों की वजह से देश का बंटवारा भी हुआ.

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कांग्रेस विधायक ने कहा कि हमें हर किसी की तस्वीर का सम्मान करना चाहिए. हमें उन सभी नेताओं का शुक्रगुजार होना चाहिए, जिन्होंने देश के लिए आजादी की लड़ाई में भूमिका निभाई. भले ही कुछ पाकिस्तान से हो सकते हैं मगर हम सबने एक साथ आजादी की लड़ाई लड़ी. पाकिस्तान खुद शहीद भगत सिंह का सम्मान करता है. आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सभी नेता सम्मान के पात्र हैं.

उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बातें कर रही है और बीजेपी पहले ये जवाब दे कि जब उनके नेता लाल कृष्ण आडवाणी पाकिस्तान गए थे तो उन्होंने वहां जाकर मोहम्मद अली जिन्ना की मजार पर जाकर उनको श्रद्धांजलि क्यों दी थी और जिन्ना की शान में कसीदे क्यों पढ़े थे?

इस मामले में अब वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अल्वी ने कहा कि जिन्ना फ्रीडम फाइटर नहीं थे, एक दिन जेल नहीं गए, पाकिस्तान बनाने के लिये वह जिम्मेदार हैं लेकिन उनकी सबसे अधिक तारीफ आडवाणी ने की. आडवाणी ने जिन्ना को सेक्युलर बताया था. कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि जसवंत सिंह ने किताब लिखी की वो महान नेता थे, इसका जवाब तो बीजेपी को देना चाहिए.

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