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नयी दिल्ली – बेरोज़गारी, धार्मिक उन्माद, ज़हरीले बयानबाज़ी, जीएसटी और नोटबंदी, नौकरियों में आई कमी से अजिज आ चुके भारतवासियों ने मोदी सरकार को नकरना शुरू कर दिया है. लोकसभा चुनाव में किये गये वादों पर पूरी तरह खरे ना उतरने के कारण मोदी सरकार को नापसंद करने वालो की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है हालाँकि सरकार को सत्ता में आये चार वर्ष होने वाले है लेकिन चुनावी मेनफेस्टों पर अंकित किये गये अपने सूत्रों से भटक गयी. जिस कारण वो लोग जिन्होंने मोदी सरकार को विकास के नाम पर बहुमत से अपनाया था वो दूरी बनाते हुए नज़र आ रहे हैं.

इसी बीच मोदी सरकार की लोकप्रियता को लेकर एबीपी न्यूज़ ने सीएसडीएस-लोकनीति के साथ मिलकर एक सर्वे कराया सर्वे के मुताबिक मोदी सरकार के कामकाज से खुश रहने वालों की संख्या में कमी आई है। सर्वे के मुताबिक मोदी सरकार के कामकाज से अंसतुष्टों का आंकड़ा 10 महीने में बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच गया है। इससे पहले मई 2017 में हुए सर्वे में अंतुष्टों का आंकड़ा 27 फीसदी था जो 13 फीसदी बढ़कर अब 40 फीसदी हो गया है। यानी मोदी सरकार की लोकप्रियता में कमी आई है। इस सर्वे में 19 राज्यों के 175 लोक सभा सीटों के आंकड़े इकट्ठे किए गए हैं। यह सर्वे 7 से 20 जनवरी के बीच किया गया है।

वहीँ एक बीजेपी के लिए एक अच्छी खबर यह भी है की अगर इस समय चुनाव होता है तो तब भी भाजपा की सरकार ही बनने के चांसेस हैं. सर्वे के मुताबिक दक्षिण भारत (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, और केरल) में एनडीए की स्थिति कमजोर जबकि यूपीए को फायदा हो सकता है। वहां की कुल 132 सीटों पर एनडीए को 34 , यूपीए को 63 और अन्य को 35 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। 2017 के सर्वे के मुताबिक एनडीए को 39, यूपीए को 52 और अन्य को 41 सीटें मिल रही थीं। यानी दक्षिण भारत में एनडीए की लोकप्रियता में कमी आई है। उसे पांच सीटों का नुकसान उठाना पड़ रहा है जबकि कांग्रेस की अगुवाई वाले यूपीए को 11 सीटें ज्यादा मिलती दिख रही हैं। अन्य को भी 6 सीटों का नुकसान होता दिखाया गया है। इस सर्वे में साफ है कि इस साल होने वाले कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को सत्ता में वापसी के लिए एड़ी चोटी एक करना पड़ सकता है।

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