pankhuri pathak samajwadi akhilesh

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार रात मल्टिनैशनल कंपनी ऐपल में एरिया मैनेजर विवेक तिवारी के साथ हुए पुलिस शूटआउट मामले में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि वह अब तक अलीगढ़ में हुई फर्जी मुठभेड़ को लेकर खामोश है।

अखिलेश यादव के दोहरे रवैये पर सवाल खड़े करते हुए सपा की पूर्व प्रवक्ता और हाल ही में समाजवादी पार्टी को अलविदा कहने वाली पांखुड़ी पाठक ने कहा कि वह क्यों कामयाब हैं और आप क्यों नाकामयाब। सच सुनने की हिम्मत है ? विवेक तिवारी उनका वोटर था- उन्होंने तुरंत डेमैज कंट्रोल किया – आज उसका परिवार संतुष्ट है। जितेंद्र यादव आपका वोटर था – आपने उसके लिए कोई बड़ा आंदोलन नहीं किया। नौशाद मुस्तकीम का साथ देने की आपमें हिम्मत नहीं।

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दरअसल, सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिये कि पुलिस की गोली से मरने वाला विवेक तिवारी ब्राहमण था इसलिये सरकार ने तुरंत एक्शन ले लिया और रातों रात मुआवजा से लेकर आरोपी पुलिसकर्मी को जेल तक भेज दिया। लेकिन ऐसा दूसरे मामलों में नहीं हो पाया, जबकि यूपी पुलिस ने कई निर्दोषों को बदमाश बताकर मारा है।

जिस पर पांखुड़ी पाठक ने कहा कि हम लोगों ने नॉएडा, लखनऊ और वाराणसी में प्रदर्शन किया लेकिन क्यूँ मुख्य विपक्षी पार्टी ने पूरे प्रदेश में आंदोलन नहीं किया ? कोई बड़ा नेता क्यों जितेंद्र के घर नहीं पहुँचा? उसके परिवार से मिलने में इतना समय क्यों लगाया? क्यों सरकारी नौकरी या मुआवज़े की मांग सरकार के आगे नहीं रखी?

पांखुड़ी पाठक ने कहा कि सुबह ख़बर मिलते ही मैंने ख़ुद एक एक चैनल को फ़ोन किया था । मीडिया अगर ख़बर नहीं बनाता तो जितेंद्र के बारे में आप सब को पता भी नहीं चलता। हमने विरोध प्रदर्शन भी किया। नॉएडा के लगभग सभी गाँव से यादव समाज के बड़े बुज़ुर्ग से ले कर युवा फोर्टिस अस्पताल पहुँचे। कई दिन वहाँ लोग डटे रहे।

उन्होने बताया कि पूरे यादव समाज में भारी आक्रोश था। मेरे सामने की बात है कि भाजपा के एक प्रवक्ता को फोर्टिस से जान बचा कर भागना पड़ा था- इतना ग़ुस्सा था यादव समाज के युवाओं में। अगर इस मामले में कोई कमज़ोर रहा तो उस पार्टी का नेतृत्व जिसे जितेंद्र का परिवार वोट देता था।

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