प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पकोड़े बेचे जाने को रोजगार बताए जाने पर कांग्रेस के वरिष्ट नेता पी. चिदंबरम ने तंज कसते हुए कहा कि यदि पकौड़ा बेचना भी नौकरी है तो फिर भीख मांगने को भी रोजगार के एक विकल्प के तौर पर देखना चाहिए.

चिदंबरम ने कहा, ‘पीएम ने कहा था कि पकौड़े बेचना रोजगार है. इस तर्क से तो भीख मांगना भी रोजगार है. अब तो जीवनयापन के लिए भीख मांगने वाले गरीबों और विकलांगों को भी नौकरीपेशा की तरह देखा जाना चाहिए.’ उन्होंने कहा, सरकार नौकरियों के अवसर पैदा करने के मामले में पूरी तरह से फेल है और उसे कुछ सूझ नहीं रहा है.

बता दें कि 19 जनवरी को एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने सवालिया अंदाज में कहा था, ‘यदि एक शख्स पकौड़े बेचता है और शाम को 200 रुपये लेकर घर पहुंचता है तो क्या उसे रोजगार माना जाएगा या नहीं?

चिदंबरम ने कहा कि सच यही है कि तीन सालों के दौरान भारत की ग्रोथ रेट, जॉबलेस रही है और सरकार को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि कैसे रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं. पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, ‘रोजगार के मौकों में होने वाली बढ़ोतरी निजी निवेश, खपत, निर्यात और क्रेडिट डिमांड में होने वाली बढ़ोतरी से तय होगी.’ हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हो पा रहा है.

उन्होंने मनरेगा को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार के एक मंत्री चाहते हैं कि मनरेगा मजदूरों को नौकरीपेशा माना जाए. अगर ऐसा है तो इसके मुताबिक कोई मजूदर 100 दिन तक नौकरीपेशा हैं जबकि बाकी 265 दिन वह बेरोजगार होगा.

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