ओवैसी का दावा – इस बार केंद्र में कांग्रेस-बीजेपी की सरकार बनना मुश्किल

नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन औवेसी ने लोकसभा चुनाव से पहले ही केंद्र में सरकार को लेकर बड़ा दावा किया है। ओवैसी ने कहा कि इस बार केंद्र में तीसरे मोर्चे की सरकार बनेगी।

ओवैसी ने पीएम नरेंद्र मोदी निशाना साधते हुए कहा कि इस बार के चुनाव में कोई मोदी लहर नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र में गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेसी मोर्चे के सरकार बनाने की संभावना है। ओवैसी ने कहा कि इस मोर्चे में एक क्षेत्रीय नेता पीएम के तौर उभरेगा। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि 543 लोकसभा सीटों में से लगभग हर सीट पर कड़ा मुकाबला होगा।

पीटीआई को दिए इंटरव्यू में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इस बार हैदराबाद समेत देश की सभी 543 सीटों पर कड़ा मुलबला होने के आसार है। ओवैसी ने कहा कि पीएम मोदी के खिलाफ बोलने का मतलब बहुसंख्यक आबादी के खिलाफ बोलना नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं बहुसंख्यक आबादी के खिलाफ नहीं हूं। इसके बाद ओवैसी ने कहा कि वह बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ हैं और उनकी हमेशा उनकी खिलाफत करते रहेंगे।

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सांसद ने कहा, लोकसभा चुनाव 2019 में गैर कांग्रेसी और गैर भाजपाई सरकार बनेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी एआईएमआईएम गैर कांग्रेसी- गैर भाजपाई मोर्चे का हिस्सा होगी। ओवैसी ने बताया कि इस मोर्चे का नेतृत्व तेलंगाना राष्ट्र समिति के सस्थापक और सीएम के चंद्रशेखर राव करेंगे।

औवेसी ने कहा कि यह मोर्चा भारत की राजनीतिक विविधता का प्रतिनिधित्व करने के लिए आवश्यक होगा और कई क्षेत्रीय नेता हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तुलना में अधिक सक्षम हैं। उन्होंने दावा किया कि हताश भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने” के लिए चुनावी में राष्ट्रीय सुरक्षा का सहारा ले रही है, लेकिन लोग फिर से उसके ‘जुमलों’ (झूठे वादों) के चक्कर में नहीं पड़ेंगे और जिम्मेदारी से मतदान करेंगे।

ओवैसी ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 543 लोकसभा क्षेत्रों में से 100 में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। लेकिन 320 से अधिक सीटों पर भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच त्रिकोणीय लड़ाई है।मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 के आम चुनाव में भाजपा द्वारा जीती गई 280 सीटों में एक भी मुस्लिम सांसद नहीं था क्योंकि भाजपा केवल बहुसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधित्व वाले लोकतंत्र को ही चलाना चाहती हैं।

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