अयोध्या विवाद का कोर्ट के बाहर सुलझाने की सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बाबरी मस्जिद का मुद्दा मालिकाना हक़ से जुड़ा हुआ हैं.

उन्होंने कहा, “याद रहे कि बाबरी मस्जिद का केस मालिकाना हक़ से जुडा हुआ था और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गलत फैसला देते हुए ज़मीन के बंटवार का आदेश दिया. इसलिए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई.” ओवैसीा ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट को इस मामले की जल्द प्रतिदिन सुनवाई शुरू करनी चाहिए ताकि इसका जल्द निर्णय सामने आये.

सांसद ओवैसी का कहना है कि यह कोई ऑर्डर नहीं है बल्कि एक ऑब्जरवेशन है. झगड़ा टाइटल का है, जिसके पास टाइटल है, उसी के हक में फैसला होगा. इससे पहले भी कई बार बातचीत हो चुकी है, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यह फैसला किया है कि अब वह किसी से बातचीत नहीं करेंगे. पर्सनल बोर्ड ने कहा है कि इस मसले की रोज सुनवाई हो और जल्द से जल्द फैसला किया जाए.

उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट छुट्टियों में तीन तलाक के मसले पर बैठ सकता है, तो अयोध्या मुद्दे पर भी लगातार सुनवाई होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि यह गंभीर मामला है. जब तीन तलाक का मसला सुन रहे हैं तो उसी के साथ में इस मसले को भी सुन लीजिए. जल्दी फैसला कर लीजिए क्योंकि छह बार इस मुद्दे पर पहले भी बातचीत हो चुकी है.

वहीँ बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक ज़फरयाब जिलानी ने कहा कि इस मामले में कोर्ट से बाहर सुलह के प्रयास पहले फेल हो चुके हैं इसलिए कोर्ट के बाहर कोई समाधान होना सम्भव नही है. वहीँ कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि जब इस मामले का बातचीत से कोई हल नही निकला तभी तो मामला कोर्ट में गया हैं.

आपको बता दें कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह एक संवेदनशील और भावनात्मक मामला है. कोर्ट ने कहा कि ‘संवेदनशील मसलों का आपसी सहमति से हल निकालना बेहतर है.’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस विवाद का हल तलाश करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को नये सिरे से प्रयास करने चाहिए.

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