उत्तरप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद सेक्युलर दलों ने धर्मनिरपेक्ष वोटों के विभाजन का ठीकरा असदुद्दीन ओवैसी पर फोड़ दिया हैं. हालांकि असदुद्दीन ओवैसी ने इन आरोपों को पूरी तरह से नकारते हुए कहा कि उन्होंने बीजेपी की कोई मदद नहीं की.

शनिवार को पार्टी मुख्यालय दारुस्सलाम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए सवाल उठाया कि एमआईएम ने उत्तर प्रदेश में केवल 35 सीटों पर चुनाव लड़ा था जबकि 368 अन्य सीटों पर उनका कोई उम्मीदवार नहीं था. ऐसे में एमआईएम पर बीजेपी की मदद करने का आरोप लगाना निराधार हैं.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के ‘तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल’ मुस्लिम और धर्मनिरपेक्ष मतों के विभाजन को रोकने में असफल रहे है. उन्होंने सवाल उठाया, क्या धर्मनिरपेक्ष मतों के विभाजन ने देवबंद जैसी सीटों से भाजपा को जीत दिलाने में मदद की, जहां करीब 80% मतदाता मुसलमान हैं. उन्होंने कहा कि अब धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को उनके प्रदर्शन और रणनीतियों पर गंभीर आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है.

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ओवैसी ने स्पष्ट रूप से कहा कि सांप्रदायिक दलों को सत्ता में आने से रोकने की ज़िम्मेदारी केवल मुसलमानों की नहीं हैं. उन्होने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुआ कहा कि यूपी चुनाव के परिणामों ने एक बार फिर से मुस्लिम वोट बैंक का भ्रम तोडा हैं.

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