रोहिंग्या मुसलमानों को देश को खतरा बताते हुए अवैध अप्रवासी कहने पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की आलोचना की है.

ओवैसी ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों को अवैध अप्रवासी कहा जाना उचित नहीं है. उन्होंने कहा, “गृह मंत्री का बयान कपटपूर्ण है. ओवैसी ने कहा कि भारत में मौजूद अधिकांश रोहिंग्या लोगों के पास शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) द्वारा जारी किए गए कार्ड हैं.

एआईएमआईएम नेता ने कहा कि चकमा भी बांग्लादेश से थे और उन्हें भारतीय नागरिकता दी गई. उन्होंने दावा किया कि श्रीलंका के तमिल भी इसी तरह से भारत आए थे. उन्होंने कहा, सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि जीवन का अधिकार और समानता का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों के लिए ही नहीं, बल्कि विदेशियों के लिए भी है.

ओवैसी ने कहा, “दुनिया जानती है कि रोहिंग्या देशविहीन और बेदखल किए गए लोग हैं और वह 1947 के बाद से सभी मानवाधिकारों से वंचित है. इस दौरान उन्होंने म्यांमार की स्टेट काउंसिलर आंग सांग सू की के बयान को भी झूठा कहा. सू की ने कहा था कि रोहिंग्या इससे पहले बहुत ही सुरक्षित कैंपों में रह रहे.

लोकसभा सदस्य ने कहा कि वो खुद बांग्लादेश क्यों नहीं चली जातीं. बांग्लादेश उनका पड़ोसी देश है वह वहां जाकर विस्तार से बात क्यों नहीं करतीं. उन्होंने स्वतंत्रता के ऊपर एक किताब लिखी है लेकिन सबसे पहले ज़रूरत इस बात की है कि वो खुद इसे अपनाएं व इस पर बात करें. औवैसी ने कहा कि सू की नोबल पुरस्कार पर एक काला धब्बा हैं.

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