राम मंदिर पर RSS प्रमुख का बयान, ओवैसी ने कहा – मंदिर का निर्माण कानून बनाने से किसने रोका ?

7:02 pm Published by:-Hindi News

विजयदशमी से पहले अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होने कहा कि मंदिर पर चल रही राजनीति को खत्म कर इसे तुरंत बनाना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत हो तो सरकार इसके लिए कानून बनाए।

भागवत के इस बयान पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (एआईएमएआईएम) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि आरएसएस और उनकी सरकार को मंदिर का निर्माण करने से किसने रोका है? उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र को साम्राज्यवाद में परिवर्तित किए जाने का यह एक स्पष्ट उदाहरण है।

ओवैसी ने कहा, ‘आरएसएस और भाजपा साम्राज्यवाद पर विश्वास करते हैं। वो बहुलतावाद या कानून के शासन पर विश्वास नहीं करते हैं। वो कानून को नजरअंदाज कर रहे हैं। जब सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि आप किसी धर्म को लेकर खास कानून नहीं बना सकते हैं। फिर भी अगर वो कानून बनाना चाहते हैं तो बनाएं। उन्हें किसने रोका है?

वहीं बाबरी एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा कि मोहन भागवत का ये बयान कोई नया नहीं है। बार-बार जानबूझ कर राम मंदिर निर्माण लोग बोल रहे हैं। जिलानी के अनुसार ये एक सोची समझी रणनीति के तहत ऐसे बयान दे रहें हैं, जिससे सुप्रीम कोर्ट के जजों को प्रभावित किया जा सके। लेकिन कोर्ट को प्रभावित न तो आरएसएस कर सकती है और न ही सरकार। ये सिर्फ अपने वोट बैंक को लुभाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। दरअसल सरकार में प्रधानमंत्री या कोई भी मंत्री इस विषय में बयान नहीं दे सकता क्योंकि मामला असंवैधानिक हो जाएगा।

साथ ही जफरयाब जिलानी ने कहा कि इस मामले पर सदन से भी कोई कानून नहीं बन सकता। ये असंभव है। जफरयाब ने कहा कि हमारे देश में सुप्रीम कोर्ट के बहुत से ऐसे जजमेंट हैं, जो ये कह चुके हैं कि कोई भी सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करने के लिए कानून नहीं लाया जा सकता। हां, किसी कानून के आधार, जिसकी व्याख्या कोर्ट ने की हो तो उस आधार को बदलने के लिए संसद कानून बना सकती है। इस मसले में साफ है कि यहां कोई आधार की बात नहीं है। यहां तथ्य पर बात आई है। हाईकोर्ट ने तीन हिस्से में जमीन का बंटवारा किया है। ये जजमेंट तथ्य पर आधारित है, लिहाजा इसे निरस्त करना संविधान के अनुरूप नहीं है।

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