किशनगंज में ओवैसी ने बढ़ाई महागठबंधन की परेशानी, उठाया ‘सीमांचल के न्याय’ का मुद्दा

7:22 pm Published by:-Hindi News

एआईएमआईएम के नेता असदद्दुदीन ओवैसी की नजर बिहार की किशनगंज सीट पर है। ओवैसी ने किशनगंज से अपना उम्मीदवार उतारा है। 70 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले किशनगंज में ओवैसी ने ‘सीमांचल को न्याय”का मुद्दा उठाकर महागठबंधन के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है।

पिछले चुनाव में जदयू प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े अख्तरुल ईमान को एमआईएमआईएम ने अपना उम्मीदवार बनाया है। 2014 के चुनाव में किशनगंज सीट से कांग्रेस उम्मीदवार असरार-उल-हक़ क़ासमी ने जीत दर्ज की थी। अख्तरुल ईमान तीसरे स्थान पर रहे थे।

एआईएमआईएम के अख्तरुल ईमान ने कहा कि पिछले सात दशक में किशनगंज में चुनाव दिल्ली की तख्त के लिये होता था लेकिन इस बार चुनाव ‘सीमांचल के न्याय’ के लिये हो रहा है और उन्हें पूरा विश्वास है कि जनता उन्हें विजयी बनायेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 70 वर्षो में सीमांचल का विकास नहीं हो पाया है, यहां उद्योग नहीं है, बुनियादी सुविधाएं नहीं है, रोजगार नहीं है। लोग परेशान है। अब तक प्रमुख दलों ने यहां के लोगों को धोखा देने का काम किया है। इसलिये एआईएमआईएम लोगों की आवाज बनना चाहती है।

अख्तरुल ईमान ने मुसलमानों के अलग-अलग मुद्दों को बड़ी मुखर होकर उठाया है। वह हमेशा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविधालय के माइनॉरिटि स्टेटस का मुद्दा, किशनगंज कैम्पस का मुद्दा, सच्चर कमिटी, रंगनाथ मिश्रा कमिटी, फातमी कमिटी, महमूदुर्राहमन कमिटी की सिफ़ारिशों को लागू करने का मुद्दा और सीमांचल को स्पेशल स्टेटस दिलाने के मुद्दे पर मुखर होकर बात करते रहे है।

किशनगंज लोकसभा क्षेत्र में अब तक हुए 16 चुनावों में सबसे ज्यादा आठ बार कांग्रेस के उम्मीदवारों को जीत मिली है। कांग्रेस के अलावा प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और जनता पार्टी को एक-एक बार, जनता दल को दो बार, राजद को तीन बार और भाजपा को भी एक बार जीत हासिल हुई है।

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