Tuesday, July 27, 2021

 

 

 

बंगाल में चुनाव प्रचार रोकने के फैसले पर ओवैसी ने उठाया सवाल – पूर्वी उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं लगाई रोक

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चुनाव आयोग की ओर से हिंसा को देखते हुए पश्चिम बंगाल में नीयत समय से 20 पहले ही चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी गई है. इस फैसले के बाद एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इस तरह के निर्णय चुनाव आयोग को पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए भी लेना चाहिए.

ओवैसी ने ट्वीट किया, ”केवल पश्चिम बंगाल ही क्यों, प्राकृतिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांत की मांग है कि पूरे सातवें चरण के लिए ऐसा होना चाहिए, पश्चिम बंगाल ही क्यों, पूर्वी उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं.” वैसे उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश के संदर्भ में अपनी इस मांग का कोई कारण नहीं बताया.

बुधवार को कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा को देखते हुए चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के नौ संसदीय क्षेत्रों में चुनाव प्रचार शुक्रवार की जगह बृहस्पतिवार को ही रात दस बजे खत्म करने का एलान किया है.

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चुनाव आयोग के आदेश पर ममता बनर्जी ने कहा कि अमित शाह के इशारे पर चुनाव आयोग ने ऐसा फैसला लिया. बिहार, यूपी और त्रिपुरा की तरह बंगाल को न समझा जाए. राज्य सरकार की सुरक्षा होती तो हिंसा नहीं होती. चुनाव आयोग ने बीजेपी के इशारे पर फैसला लिया है.’

ममता ने आगे कहा, ‘वे (बीजेपी) बाहर से गुंडे ले आए. उन लोगों ने गेरुआ पहना था, वे कैंपस में घुस गए. दंगा भड़काने के बाद वे चले गए. हमने छात्रों और बुद्धिजीवियों को नियंत्रित किया.’ ममता ने पूछा कि अमित शाह को चुनाव आयोग ने नोटिस क्यों नहीं दिया. अमित शाह चुनाव आयोग को धमका रहे हैं. नरेंद्र मोदी ने माफी तो दूर मूर्ति तोड़ने की निंदा भी नहीं की. ममता ने कहा कि चुनाव आयोग में आरएसएस के लोग भरे हैं. बीजेपी ने बंगाल और बंगालियों का अपमान किया है.

ममता बनर्जी के समर्थन में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ट्वीट किया और कहा कि चुनाव आयोग का फैसला लोकतांत्रिक नियमों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि वे ममता बनर्जी के साथ हैं. अखिलेश ने कहा कि यह लड़ाई ढाई लोगों के खिलाफ है जिन्होंने अपने फायदे के लिए देश की संस्थाओं के साथ खिलवाड़ किया है.

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