तीन तलाक को आपराधिक घोषित वाला विधेयक केंद्र की मोदी सरकार द्वारा गुरुवार को भारी राजनीतिक हंगामे के बीच पेश किया गया.

इस बिल का सबसे पहले विरोध आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने किया. उन्होंने इस बिल को संविधान के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा, यह विधेयक संविधान की अवहेलना करता है और कानूनी रूपरेखा में उचित नहीं बैठता.

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उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय के मामलों से निपटने के लिए घरेलू हिंसा कानून और आईपीसी के तहत अन्य पर्याप्त प्रावधान हैं और इस तरह के नए कानून की जरूरत नहीं है. ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक पारित होने और कानून बनने के बाद मुस्लिम महिलाओं को छोड़ने की घटनाएं और अधिक बढ़ जाएंगी.

एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि यह विधेयक मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और संसद के पास कानूनन हक नहीं है कि वह इस पर कानून बना सके. ओवैसी ने कहा कि विधेयक यदि पारित हो जाता है तो यह मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बुरा दिन होगा.

इस सबंध में कानून मंत्री प्रसाद ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक दिन है जो इस सदन में मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए विधेयक पेश किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘यह कानून किसी पूजा, इबादत या मजहब से जुड़ा नहीं होगा बल्कि नारी सम्मान और गरिमा के लिए है.”

प्रसाद ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने ‘तलाक ए बिदत’ को गैरकानूनी करार दिया जिसके बाद अगर मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय की घटनाएं हो रहीं हैं तो क्या यह सदन खामोश रहेगा? उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य बुनियादी अधिकारों और अधिकारों की समानता की बात कर रहे हैं तो क्या इस सदन को तीन तलाक की पीड़िताओं के साथ हो रहे अन्याय को नहीं देखना होगा.

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