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आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि विधेयक को ‘संविधान के खिलाफ’ बताते हुए कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि भारत इस्राइल नहीं है जहां धर्म के आधार पर नागरिकता दी जाए। 

माकपा के मोहम्मद सलीम ने कहा कि यह विधेयक समस्या का समाधान नहीं है, इससे नई समस्या पैदा होगी। असम में आज वही स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने विधेयक पर विरोध जताते हुए कहा कि धर्म और भाषा के आधार पर नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए।

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सलीम ने आरोप लगाया कि ऐसा करके ‘कानून नहीं बनाया जा रहा, बल्कि 2019 के चुनाव के लिए भाजपा का घोषणापत्र लिखा जा रहा है।’ एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि यह विधेयक वापस लिया जाना चाहिए क्योंकि यह संविधान और असम समझौते के खिलाफ है।

वहीं कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इसमें कई कमियां हैं। इसे विचार के लिए सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक मामला है और इस पर और पड़ताल की जरूरत है। यह असम समझौते की भावना के अनुरूप नहीं है।

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