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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में कश्मीरी छात्रों के निलंबन को लेकर AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र से मामले हस्तक्षेप करने की मांग की है। ओवैसी ने कहा है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कैंपस में कश्मीरी छात्रों ने आजादी के नारे नहीं लगाए थे। वहीं मुफ़्ती ने कहा, छात्रों की आवाज दबाने के परिणाम अच्छे नहीं होंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट में लिखा,’ छात्रों की आवाज दबाने के परिणाम अच्छे नहीं होंगे। छात्रों पर से केस वापस लिए जाने पर केंद्र हस्तक्षेप करे और एएमयू प्रशासन उनका निलंबन वापस ले। जम्मू-कश्मीर के बाहर की राज्य सरकारों को स्थिती पर संवेदनशील होना चाहिए, ताकि इनके अलगाव को रोका जा सके।

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महबूबा मुफ्ती ने आगे लिखा, ‘छात्रों को अपने सहपाठी जो कि कश्मीर में लगातार हिंसा का पीड़ित हो, उसे याद करने के लिए सजा देना गलत होगा।’

वहीं ओवैसी ने कहा है कि सरकार इसके पुख्ता इंतजाम करने चाहिए कि कश्मीरी छात्र विश्वविद्यालय छोड़ कर न जाएं। उन्होंने कहा के बेहतर ये होता कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति, एचएमए के कश्मीर मामलों के सचिव इस मुद्दे पर छात्रों से बात कर कोई रास्ता निकालें।

बता दें कि पनी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में12,00 कश्मीरी छात्रों ने AMU छोड़ने की धमकी दी है। एएमयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष सज्जाद राथर ने विश्वविद्यालय के कुलपति तारिक मंसूर को भेजे गए पत्र में कहा है कि अगर कश्मीरी छात्रों की छवि खराब करने की कोशिशें बंद नहीं हुईं तो एएमयू के 1200 से ज्यादा कश्मीरी छात्र आगामी 17 अक्टूबर को विश्वविद्यालय छोड़कर अपने-अपने घर लौट जाएंगे।

इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी सफाई दी है। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर का कहना है कि पहली बात तो ये कि विश्वविद्यालय में 1200 कश्मीरी छात्र नहीं हैं। विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 950 छात्र हैं, जहां तक कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा की बात है तो किसी के बहकावे में न आएं। यहां पढ़ने वाले सभी छात्र बेहतर हैं और वो भरोसा दिलाते हैं कि उन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।

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