तीन तलाक के गैरकानूनी घोषित करने के लिए कानून ला रही मोदी सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र लिखा है.

उन्होंने मोदी सरकार के इस कदम को राजनीति से प्रेरित करार देते हुए कहा कि जेंडर जस्टिस के नाम पर राजनीतिक लाभ उठाया जा रहा है. ओवैसी ने कहा कि सरकार को इस कानून के संबंध में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से राय मशविरा कर उनके विचार जानने चाहिए.

इसी के साथ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य व ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि कानून का मसौदा तैयार करने से पहले उलमा से राय लेनी चाहिए थी.

उन्होंने कहा, सरकार एक तरफ मुस्लिम महिलाओं के हक की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गोरक्षा व लव जिहाद के नाम पर मुस्लिमों पर अत्याचार कर रही है. साथ ही सवाल उठाया कि कोर्ट में सुनवाई से पहले देश की तीन करोड़ महिलाओं ने हस्ताक्षर करके शरीअत में दखल न देने की अपील की थी, सरकार ने उनकी अपील क्यों नहीं सुनी.

ध्यान रहे मोदी कैबिनेट ने वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है. जिसके तहत तीन तलाक़ गैरकानूनी करार देते हुए 3 साल की सज़ा का प्रावधान रखा गया है.

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