लखनऊ; ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी इस बार हैदराबाद के साथ ही उत्तर प्रदेश की एक सीट से भी लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। AIMIM के यूपी अध्यक्ष शौकत अली ने बैठक के दौरान यह विचार रखा।

हालांकि इस सुझाव पर औवैसी ने कहा है कि वह कुछ दूसरे नेताओं से बातचीत करके और पब्लिक फीडबैक लेने के बाद ही इस पर कोई फैसला लेंगे। ओवैसी ने इस बात की पुष्टि की है कि उनकी पार्टी की उत्तर प्रदेश यूनिट ने उनके सामने यह प्रस्ताव रखा है। उस पर वह विचार कर रहे हैं।

ओवैसी ने कहा, ‘शौकत साहब हैदराबाद में पार्टी की मीटिंग में शामिल होने आए थे। उन्होंने यह प्रस्ताव रखा है कि मैं उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ूं। मैंने उनसे कहा है कि उनके इस प्रस्ताव से यूपी में कई लोगों की नींद उड़ जाएगी।’ हाालंकि ओवैसी ने इसके आगे कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। शौकत अली का दावा है कि उनके प्रस्ताव से पार्टी में हर कोई खुश है।

इसके साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी चुनाव लड़ने के संकेत दिए। इसके साथ ही उन्होंने किशनगंज से बिहार इकाई के अध्यक्ष अख्तरुल इमान को पार्टी की तरफ से प्रत्याशी भी घोषित कर दिया। एआईएमआईएम के पुनरूद्धन के 61वीं वर्षगांठ के अवसर पर ओवैसी यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का महाराष्ट्र में प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अगाडी पार्टी के साथ गठबंधन है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि पार्टी महाराष्ट्र की औरंगाबाद सीट पर भी चुनाव लड़ सकती हैं।

उत्तर प्रदेश में चुनाव को लेकर ओवैसी ने कहा कि प्रदेश इकाई सिर्फ एक सीट पर चुनाव लड़ना चाहती हैं। जबकि कर्नाटक और तमिलनाडु में चुनाव लड़ने पर हम चर्चा करेंगे और फिर निर्णय लेंगे। ओवैसी  ने कहा कि उनकी पार्टी का बिहार में कोई गठबंधन नहीं है और पार्टी बिना किसी गठबंधन के चुनाव मैदान में उतरेगी। इसके साथ ही उन्होंने इस बात के भी संकेत दिए कि लोकसभा चुनाव में पार्टी तेलगांना में तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) को समर्थन करेगी जबकि आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को समर्थन देगी।

बदला-सा होगा किशनगंज का समीकरण

बिहार के किशनगंज सीट कांग्रेस का कब्जा रहा है। कांग्रेस नेता मौलाना असरारुल हक यहां से सांसद थे। करीब 80 वर्ष की आयु में पिछले साल सात दिसंबर को उनकी मृत्यु हो गई। लोकसभा चुनावों के समय पार्टी प्रचार के लिए यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी यहां आती रही हैं। असरारुल हक की मृत्यु के बाद इस बार यहां का समीकरण कुछ बदला-बदला सा होगा।

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