कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की और से मुस्लिमों को दरकिनार किए जाने को लेकर आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मोदी मुसलमानों को ध्रुवीकरण का ही संदेश देना चाहते हैं?

ओवैसी ने कहा है कि मुसलमान न तो इस पार्टी के हैं न उस पार्टी के है। ऐसे बयान देकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मोदी मुसलमानों को क्या माहौल देना चाहते हैं? यही कि मुस्लमान शब्द का इस्तेमाल ध्रुवीकरण की तरफ ले जायेगा? क्या मुसलमान शब्द इतना गन्दा है?

ओवैसी ने मोदी सरकार से सवाल किया, ‘सीआरपीएफ , सीआईएसएफ , आईटीबीपी , ये सब केंद्र सरकार के अधीन आते हैं। आप (भाजपा) पिछले चार साल से सत्ता में हैं. प्रधानमंत्री चीख चीखकर दावा करते हैं कि वह एक हाथ में कुरान और दूसरे में कंप्यूटर देना चाहते हैं। तो आपने पिछले चार सालों में (मुसलमानों के लिए) क्या किया ?’ उन्होंने कहा , ‘पिछले चार साल में केंद्रीय क्षेत्र में चाहे वह बैंक हों या रेलवे या फिर केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल, कितने अल्पसंख्यकों की भर्ती की गईं ?’

जिसके जवाब में गृह मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए धर्म कोई पैमाना नहीं है।गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए धर्म पैमाना नहीं है. भर्ती प्रक्रिया में किसी धर्म के लिए कोई गुंजाइश नहीं है’

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