नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन विधेयक को राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई है। उच्च सदन में इस बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े, जबकि 105 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। बिल पर वोटिंग से पहले इसे सेलेक्ट कमिटी को भेजने के लिए भी मतदान हुआ, लेकिन यह प्रस्ताव गिर गया। सेलेक्ट कमिटी में भेजने के पक्ष में महज 99 वोट ही पड़े, जबकि 124 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट दिया। इसके अलावा संशोधन के 14 प्रस्तावों को भी सदन ने बहुमत से नामंजूर कर दिया। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह बिल ऐक्ट में तब्दील हो जाएगा।

ऐसे में अब बिल का मुखर विरोध करने वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना पर लेते हुए कहा कि अमित शाह कहते हैं कि यह विधेयक भारतीय मुस्लिमों के खिलाफ नहीं है। उनके आपने नेता हेमंत बिस्व सरमा कहते हैं कि नागरिकता बिल हिंदुओं की रक्षा करेगा वहीं मुस्लिमों को विदेशी ट्रिब्यूनल जाना होगा। ट्रिब्यूनल के बाद डिटेंशन सेंटर में।  इसकी डेडलाइन क्या है, असम विधानसभा चुनाव 2021। दिल्ली में चोरी और असम में सीनाजोरी?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बंटवारे के बाद पैदा हुए हालात के कारण ये विधेयक लाना पड़ा। भारत ने वादा निभाया, लेकिन उसके तीन पड़ोसियों ने वादा नहीं निभाया। उन्होंने कहा कि नेहरू-लियाक़त अली समझौते को पड़ोसी देशों ने नहीं माना।

उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ‘जिसने जख्म दिए हैं, वही जख्म के बारे में पूछ रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि छह धर्म के लोगों को बिल में लाया गया है, लेकिन मुसलमानों को शामिल नहीं करने पर सवाल पूछे जा रहे हैं। गृह मंत्री ने कहा कि वो बताना चाहेंगे कि मुसलमानों को इसमें शामिल क्यों नहीं किया गया।


ये बिल हम तीन देशों के अंदर जो धार्मिक प्रताड़ना हुई है, उन्हें नागरिकता देने के लिए लेकर आए हैं। जब मैं माइनॉरिटी शब्द का इस्तेमाल करता हूँ तो विपक्ष में बैठे लोग बताएंगे कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में इस्लाम को मानने वाले अल्पसंख्यक हैं क्या? देश का धर्म इस्लाम हो तो मुस्लिमों पर अत्याचार की संभावना कम है।


उन्होंने कहा कि मुसलमानों के आने से ही क्या धर्मनिरपेक्षता साबित होगी। शाह ने कहा, “हम अपने विवेक से क़ानून ला रहे हैं और मुझे यकीन है कि अदालत में भी ये सही साबित होगा।” गृह मंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यकों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, किसी की भी नागरिकता छीनी नहीं जाएगी और धार्मिक रूप से प्रताड़ित लोगों को नागरिकता दी जाएगी।

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