Friday, October 22, 2021

 

 

 

ओवैसी बोले – क्या मोदी सरकार ने भारत को कर दी सरेंडर जमीन, राहुल ने कहा – क्या ‘Act of God’ है?

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हैदराबाद : ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच रूस में हुई दोनों देशों के विदेशमंत्रियों की बैठक को लेकर कहा कि क्या मोदी सरकार ने 1000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर भारत के अधिकार का समर्पण कर दिया है? विदेश मंत्री ने चीन से अप्रैल से पहले वाली स्थिति में आने के लिए क्यों नहीं कहा?

ओवैसी ने शुक्रवार को अपने ट्वीट में लिखा – “हमने विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान को देखा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन से लद्दाख में LAC पर अप्रैल से पहले वाली स्थिति में आने के बारे में क्यों नहीं कहा या फिर क्या विदेश मंत्री भी अपने बॉस PMO इंडिया से सहमत है कि कोई चीनी सैनिक हमारे क्षेत्र में आया ही नहीं।”

हैदराबाद के सांसद ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा, क्या मोदी सरकार ने 1000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर भारत के अधिकार का समर्पण कर दिया है? चीन चाहता है कि बॉर्डर पर तनाव के बीच निवेश, कूटनीति और बाकी सभी चीजें बनी रहे। भारत को इस पर सहमत नहीं होना चाहिए।

इसके अलावा हैदराबाद के सांसद ने अपने एक ट्वीट में कहा, ‘बॉर्डर पर पीएलए से निपटने के लिए हमारी सशस्त्र सेनाएं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही हैं। सेना के साथ किसी तरह का संकट नहीं है बल्कि चिंता इस बात की है कि ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में हमारा शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व कहीं दिख नहीं रहा है। सीमा विवाद के बारे में पीएमओ ने कई सप्ताह तक कुछ बोला क्यों नहीं?’ ओवैसी ने कहा, ‘हो सकता है कि उन्हें जब मोर को दाना चुगाने से जब फुरसत मिले तो वह देशवासियों को इस बारे में कुछ कहें या चीन का नाम लेने का साहस जुटाएं।’

वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार सुबह अपने ट्वीट में लिखा, “चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया। भारत सरकार इसे वापस हासिल करने की योजना बना रही है? या फिर इसे भी एक “दैवीय घटना बताकर छोड़ा जा रहा है।” राहुल गांधी पहले भी कई बार चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं।

बता दें कि भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की एक लंबी बैठक गुरुवार की रात मास्को में हुई। दोनों देशों के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि सीमा पर शांति एवं सद्भाव कायम करने के लिए भारत एवं चीन के बीच एक पांच सूत्रीय फॉर्मूले पर सहमति बनी है।

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