मेघालय हाई कोर्ट के जस्टिस एसआर सेन द्वारा पीआरसी (स्थायी निवासी प्रमाणपत्र) को लेकर एक मामले की सुनवाई के दौरान हिन्दू राष्ट्र की टिप्पणी पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और हमेशा धर्मनिरपेक्ष ही रहेगा।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है, इसलिए जस्टिस एसआर सेन जो कहना चाहते हैं कह सकते हैं। जस्टिस एसआर सेन को क्या पसंद है और क्या नहीं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

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उन्होनेकहा कि भारत को हमारे पूर्वजों ने एक ‘धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र’ बनाया है और हमें देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र की रक्षा करनी चाहिए। यह ‘विविधता में एकता’ का सवाल है। आपको बता दें कि मेघालय हाई कोर्ट के न्यायाधीश एस आर सेन ने कहा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था।

बता दें कि न्यायमूर्ति सेन ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि किसी को भी भारत को दूसरा इस्लामिक देश बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। न्यायाधीश ने फैसले कहा कि उनका विश्वास मोदी में है कि वह भारत को दूसरा इस्लामिक देश बनने से बचाएंगे।

उन्होंने मोदी से यह भी आग्रह किया कि पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान में रह रहे गैर मुस्लिमों को भारत आने की अनुमति व यहां की नागरिकता पाने के लिए कानून बनाएं।

जस्टिस सेन ने ये भी कहा  कि किसी को भी भारत को दूसरा इस्लामिक देश बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो भारत और दुनिया के लिए यह सबसे खराब दिन होगा। उन्हें विश्वास है कि पीएम मोदी की सरकार इस चीज को समझेगी। जब तक किसी को राज्य में रहने का मन है तब तक उसे पीआरसी के लिए आवेदन करने का हक है।

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