ट्रिपल तलाक पर केंद्र की मोदी सरकार की और से लाये गए अध्यादेश को असंवैधानिक करार देते हुए ऑल इंडिया मज्लिस ए इतेहदुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असद्दुदीन ओवैसी ने कहा कि यह अध्यादेश संविधान के समानता के अधिकार को चुनौती दे रहा है क्याेंकि इसमें निशाना केवल मुसलमानों को बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश मुस्लिम महिलाओं को किसी तरह का न्याय नहीं देगा। इस्लाम में विवाह एक सामाजिक अनुबंध है और इसमें दंड प्रावधान के अंतगर्त लाना सरासर गलत है। उन्होने कहा, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और महिला संगठनों को सर्वोच्च न्यायालय में इस अध्यादेश के खिलाफ चुनौती देनी चाहिए।

ओवैसी ने सीधा प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि  कानून उन शादी शुदा महिलाओं के लिए भी लाया जाए जिनके पति चुनाव शपथ पत्र में यह कहते हैं कि वह शादी शुदा हैं लेकिन उनकी पत्नी उनके साथ नहीं रहती हैं। देश में ऐसी महिलाओं की संख्या 24 लाख है।

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वहीं कांग्रेसी ने अध्यादेश के जरिए राजनीति करने का आरोप लगाया। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के मुताबिक भाजपा ने 2019 के चुनावों के देखते हुए तीन तलाक को एक राजनीतिक मुद्दा बनाकर रख दिया है। जबकि, कायदे से तो यह महिलाओं को न्याय दिलाने की ही एक लड़ाई होनी चाहिए थी। लेकिन, भाजपा ने इसको भी सियासी रंग दे दिया।

बता दें कि इस अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार देर रात इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। केंद्र सरकार के पास अब इस बिल को 6 महीने में पास कराना होगा। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इस अध्यादेश को मंजूरी दी थी। यह अध्यादेश अब 6 महीने तक लागू रहेगा।

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