सोची समझी साजिश के तहत एक पूरी कौम को बदनाम किया जा रहा: उमर अब्दुल्ला

पुलवामा अटैक के बाद देश के कई हिस्सों में कथित तौर पर कश्मीरी छात्रों और लोगों के खिलाफ हिंसा को लेकर नैशनल कान्फ्रेंस के लीडर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यदि देश भर में ऐसा है तो क्या फिर किसी टूरिस्ट को कश्मीर नहीं आना चाहिए? अमरनाथ की यात्रा नहीं करनी चाहिए?

उमर अब्दुल्ला ने कश्मीरियों के खिलाफ प्रॉपेगेंडा को लेकर कहा कि हमें इस मसले को लेकर उम्मीद थी कि पीएम नरेंद्र मोदी ऐसे लोगों की निंदा करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उमर अब्दुल्ला ने कहा, ”एक सोची समझी साजिश के तहत एक पूरे कौम को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। कश्मीरियों को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होने कहा, हमारे जो बच्चे-बच्चियां बाहर के यूनिवर्सिटी में तालीम हासिल करने गए, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।’ जम्मू और कश्मीर में मुसलमानों की आबादी है और बार-बार हमें निशाना बनाया जा रहा है। लगातार संदेह किया जा रहा है। हमने सुना है, पीएम ने लाल किले से कहा है कश्मीर उनके दिल के करीब है। अब केंद्र सरकार  कश्मीरी छात्रों के मुद्दे पर चुप है। हमारे एक गर्वनर कश्मीर के व्यापार के बहिष्कार करने की बात करते हैं। दूसरा अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की कोशिश कर रहा है।

उमर अब्दुल्ला ने कहा, ”मेरी चिंता मुख्यधारा के नेताओं की सुरक्षा वापस लेने के बारे में है। एक तरफ, आप हमें बता रहे हैं कि हमें संसद और विधानसभा चुनावों के लिए तैयार रहना है, दूसरी ओर, आप हमें बता रहे हैं कि अब हम राज्य के संरक्षण के लायक नहीं हैं।”

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ”हम कभी भी हिंसा और आतंक के पक्ष में नहीं रहे हैं, हम केवल बातचीत के जरिए हल निकालने के पक्षधर हैं. जब हम बातचीत की बात करते हैं तो हम देश विरोधी हो जाते हैं, लेकिन सऊदी अरब के साथ संयुक्त बयान में, दोनों नेता समग्र वार्ता के बारे में बात करते हैं।”

बता दें कि पुलवामा हमले के बाद देश के कई जगहों से ऐसी खबरें आ रही थी कि लोग आतंकियों के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। कुछ यूनिवर्सिटीज के छात्रों पर ऐसा करने को लेकर कार्रवाई भी की गई है। इसके अलावा देहरादून के दो कॉलेजों ने अगले सत्र में कश्मीरी छात्रों को एडमिशन न देने का भी फरमान जारी किया है।

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