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केंद्र और महाराष्ट्र की सत्ता में अहम सहयोगी शिवसेना ने नोटबंदी को लेकर के पहले से ही मोदी सरकार के खिलाफ मौर्चा खोला हुआ हैं.

ऐसे में एक बार फिर से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा नोटबंदी के फैसले पर की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की टिप्पणी से बैंकिंग व्यवस्था की ‘विश्वसनीयता’ पर सवाल खड़े होते हैं. शिवसेना की और से कहा गया कि नोटबंदी के फैसले की अर्थव्यवस्था को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है और नीति के क्रियान्वयन ‘पूरी तरह से कुप्रबंधन’ रहा है.

नोटबंदी के फैसले के बाद फैली अराजकता का विरोध करते हुए शिवसेना के सांसदों का एक शिष्टमंडल भारतीय रिजर्व बैंक के उप गवर्नर आर गांधी से मिला. उन्होंने उप गवर्नर को ज्ञापन सौंपकर कहा कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के चलन से बाहर होने के कारण मची ‘अफरा-तफरी’ को कम करने के लिए ‘सक्रिय कदम’ उठाये जायें.

इसके अलावा ज्ञापन में कहा गया कि ‘पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की टिप्पणी से बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं जैसा कि सिंह ने सवाल किया था कि ऐसे किसी देश का नाम बताया जाये जहां के लोग अपने पैसे जमा कराते हैं, लेकिन निकाल नहीं सकते.’


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