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लखनऊ |  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव की विरासत को कहाँ तक ले जाते है यह तो समय ही बताएगा लेकिन वो राजनीती जरुर सीख गए है. कब किस मुद्दे पर बोलना है, किसका विरोध करना है, किसका समर्थन करना है, यह वो भली भांति जान गये है. भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गायत्री प्रजापति को मंत्री मंडल से निष्काषित कर उन्होंने सन्देश दे दिया था की वो समाजवादी पार्टी में एक अलग तरह की राजनीती को आगे बढ़ाना चाहते है.

उनके इसी रूप ने मुलायम सिंह से लेकर उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव तक हैरान थे. अखिलेश यादव अब समाजवादी पार्टी का नया चेहरा है. सबसे बड़ी बात यह है की प्रदेश में अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव से ज्यादा पसंदीदा नेता है. एक सर्वे के अनुसार उत्तर प्रदेश की जनता सबसे अधिक अखिलेश यादव को अगले मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहती है.

अखिलेश यादव भी चुनाव प्रचार में समाजवादी पार्टी के पुराने एजेंडा को छोड़कर विकास की बात कर रहे है. लखनऊ के एक कार्यक्रम में बोलते हुए अखिलेश ने कहा की जितना विकास समाजवादियो ने किया है उतना आज तक किसी सरकार ने नही किया. हमने यूपी के सभी शहरो को 24 घंटे बिजली दी है. लखनऊ में मेट्रो शुरू हो गयी है. देश का सबसे लम्बा एक्सप्रेस वे रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हुआ है.

नोट बंदी पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा की नोट बंदी से देश की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गयी है. जितने भी विकास कार्य चल रहे थे वो सभी रुक गए है . देश कई साल पीछे चला गया है. जो लोग यह कह रहे है की नोट बंदी देश हित में है उन्हें जनता अगले चुनाव में सबक सिखाएगी क्योकि नोट बंदी से देश का नुक्सान हुआ है. देश ऐसे उलझ गया है जिसकी कल्पना किसी ने नही की थी.


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