बिहार में, हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में 243 सीटों में से 125 सीटें जीतने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सत्ता संभाली है। नीतीश कुमार ने सोमवार को सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कुमार ने अपने मंत्रिपरिषद के सदस्यों के बीच आवंटित विभिन्न विभागों की भी घोषणा की।

पटना में राज्यपाल फग्गू चौहान ने 14 सदस्यीय परिषद की शपथ दिलाई। जिसमे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सात, जनता दल (यूनाइटेड) के पांच और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (एचएएम) और विकाससेल इन्सान पार्टी (वीआईपी) के एक-एक सदस्य शामिल है।

मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल करने से पहले जातीय समीकरण का ध्यान रखा गया। नीतीश कुमार की नई मंत्रिमंडल में दलित, यादव, भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत हैं। हालांकि, पहली बार, नीतीश कुमार कैबिनेट में कोई मुस्लिम प्रतिनिधित्व नहीं है।  यह पहली बार है जब राज्य में मुस्लिम आबादी लगभग 16 प्रतिशत है और बिहार सरकार में उसका कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

जिन गैर-एनडीए दलों या गठबंधनों ने सीटें जीती हैं, उनमें मुस्लिम विधायकों की हिस्सेदारी है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 75 विधायकों में आठ मुस्लिम हैं, कांग्रेस के 19 में से चार मुस्लिम विधायक हैं, असदुद्दीन ओवैसी के एआईएमआईएम के पांच में से पांच हैं, और वाम दलों के 16 में से एक विधायक है। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) का केवल एक विधायक मुस्लिम है।

हाल ही में हुए चुनावों में, जेडी (यू) ने 11 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, लेकिन उनमें से कोई भी विजयी नहीं हुआ। नीतीश कुमार की पिछली सरकार में मुस्लिम मंत्री रहे खुर्शीद आलम इस बार चुनाव हार गए। आलम पिछली सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री थे। बीजेपी, HAM और VIP ने किसी मुस्लिम उम्मीदवार को चुनाव में नहीं उतारा।

जहां तक ​​नीतीश कुमार कैबिनेट में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सवाल है, पार्टी में विधान परिषद (एमएलसी) के कई मुस्लिम सदस्य हैं। गुलाम रसूल बलवी, क़मर आलम, गुलाम गौस, तनवीर अख्तर और खालिद अनवर जैसे लोगों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है, अगर भविष्य में इसका विस्तार किया जाए तो।

जद (यू) एमएलसी, क़मर आलम ने कहा “वर्तमान में, नीतीश कुमार कैबिनेट को छोटा रखा गया है, लेकिन इसका विस्तार किया जाएगा। हमारी पार्टी ने 11 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे लेकिन उनमें से कोई भी जीत नहीं पाया था। भविष्य में नीतीश कुमार अपने मंत्रिमंडल में एक मुस्लिम चेहरे को शामिल करेंगे। यह संभव नहीं है कि नीतीश अपनी नई सरकार में मुस्लिम चेहरे को शामिल न करें। नीतीश ने पिछले 15 वर्षों में मुसलमानों के लिए बहुत काम किया है और उनके कल्याण और विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं।

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