बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निजी क्षेत्र में आरक्षण व्यवस्था को लागू करने की मांग उठाते हुए कहा कि पिछड़े वर्ग के लिए निजी क्षेत्र में भी पचास फीसदी आरक्षण दिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘निजी क्षेत्र में भी आरक्षण बहुत जरूरी है. इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस होनी चाहिए.’ नीतीश ने कहा, ‘निजी क्षेत्र में तबतक कोई अनुबंध नहीं होना चाहिए जब तक आश्वसन ना दिया जाए कि नौकरी को लेकर वहां आरक्षण की व्यवस्था होगी.’

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नितीश ने बिहार का हवाला देते हुए कहा कि “बिहार के रिजर्वेशन एक्ट के अनुरूप ही आउसोर्सिंग में आरक्षण का प्रावधान किया गया है. आउटसोर्स के जरिए जो भी बहाली होगी उसमें आरक्षण का पालन करना होगा.  क्योंकि इन कर्मचारियों को भी सरकारी कोष का पैसा जाता है. इसलिए सरकार का नियम इस पर भी लागू होगा.

ध्यान रहे इस मुद्दे पर मोदी सरकार पहले ही ना कर चुकी है. सरकार का कहना है कि निजी क्षेत्र में आरक्षण व्यवस्था लागू की जाए, सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है.  बीते साल नेशनल कमिशन फॉर बैकवर्ड क्लास (एनसीबीसी) ने पिछड़ा वर्ग के लिए निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था लागू करने को लेकर कानून बनाने की वकालत की थी.

तब खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों  के केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने सुझाव दिया था कि निजी क्षेत्र एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए नौकरी स्वेच्छा से दें. हालांकि बिहार से बीजेपी के वरिष्ठ सांसद हुकुमदेव नारायण सिंह ने इस मुद्दें पर नीतीश को समर्थन दिया है. उन्होंने कहा, नीतीश जी ने ये मुद्दा उठाया, इसके लिए मैं उन्हें बधाई देना चाहता हूं.

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