Nitish Kumar laid the foundation to build a grand alliance in Uttar Pradesh, the biggest challenge for soft

जेडीयू के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को ‘संघ मुक्त’ भारत की बात करते हुए ‘लोकतंत्र की रक्षा’ के लिए गैर-बीजेपी दलों के एकजुट होने की अपील की। पटना में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा कि ‘संघ मुक्त’ भारत बनाने के लिए सभी गैर-बीजेपी दल को एक होना होगा।

पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने ‘कांग्रेस मुक्त’ भारत का नारा दिया था। नीतीश ने कहा कि बीजेपी और उसकी बांटने वाली विचारधारा के खिलाफ एकजुटता ही लोकतंत्र को बचाने का एकमात्र रास्ता है। वह न तो किसी व्यक्ति विशेष और न ही किसी दल के खिलाफ हैं, पर आरएसएस की बांटने वाली विचारधारा के खिलाफ हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव पर नीतीश की नजर
नीतीश ने 2014 के लोकसभा चुनाव के पूर्व बीजेपी के वर्तमान नेतृत्व पर प्रहार करते हुए इस दल से 2013 में ही संबंध तोड़ लिया था। नीतीश इन दिनों वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बिहार के तर्ज पर ही राष्ट्रीय स्तर पर गैर-बीजेपी दलों को एकजुट करने के प्रयास में लगे हुए हैं।

शरद यादव के स्थान पर गत 10 अप्रैल को जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभालने वाले नीतीश ने कहा कि बीजेपी के तीन कद्दावर नेताओं – अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को पार्टी के भीतर दरकिनार कर दिया गया है और अब यह दल और सत्ता ऐसे व्यक्ति के हाथ में चली गई है, जिनका धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिक सौहार्द में कोई विश्वास नहीं है।

‘बीजेपी विरोधी दलों को एकजुट करने का प्रयास जारी रहेगा’
जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नीतीश ने कहा था कि बीजेपी विरोधी दलों – कांग्रेस, वामदल और अन्य क्षेत्रीय दलों की 2019 के पूर्व की व्यापक एकता के लिए उनका प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने कहा था कि हम लोग व्यापक एकता के हिमायती हैं और उसके लिए प्रयत्न करते रहे हैं और यह किसी प्रकार से होगा। कुछ दलों का आपस में मिलन भी हो सकता है। कई दलों का आपस में मोर्चा और गठबंधन भी बन सकता है। कोई एक संभावना नहीं है, इस प्रकार की अनेक संभावनाएं हैं।

नीतीश ने कहा कि हम लोगों का इसके लिए निरंतर प्रयास जारी है और अन्य लोगों के मन में भी यह बात है कि कोई न कोई एक व्यापक एकता होनी चाहिए, ताकि लोगों को दिखे कि यह शक्ति बीजेपी को बुरी तरह पराजित कर सकती है।

उन्होंने कहा था कि गैर-बीजेपी दलों की एकजुटता का मतलब विचारधारा और सुशासन का न्यूनतम साझा कार्यक्रम होगा। नीतीश ने यह भी कहा था कि इस मोर्चे में कोई भी प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं होंगे, जनता इस बारे में तय करेगी कि कौन इसके लायक हैं।


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