Starting mess in grand alliance

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बिहार – नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सभी न्यायिक सेवाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है अगर यह फैसला तुरंत प्रभावी होता है तो OBC, अन्य पिछड़ा वर्ग अनुसूचित जाति एवम जनजाति के लिए बहुत बड़ा कदम माना जायेगा. इस बात की जानकारी देते हुए डॉ. धर्मेंद्र सिंह गंगवार, प्रधान सचिव, सामान्य प्रशासन ने कहा कि इस फैसले के अंतर्गत बिहार उच्च न्यायिक सेवा जिला न्यायधीश और बिहार असैनिक सेवा के पद पर सीधी नियुक्ति में अत्यंत पिछड़ा वर्ग को 21 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग के लिए 12 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के लिए 1 प्रतिशतआरक्षण का प्रावधान किया गया है।

इस आरक्षण में  महिलाओं को क्षैतिज रूप से  35 प्रतिशत और  शारीरिक रूप से अक्षम को एक  प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. यानी  किसी भी श्रेणी की आरक्षित कुल सीटों में उसी श्रेणी की महिलाओं को 35 प्रतिशत  और शारीरिक रूप से अक्षम को एक प्रतिशत आरक्षण मिलेगा.  अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी  की सीटों में भी 35 प्रतिशत  महिलाओं को और एक प्रतिशत शारीरिक  रूप से अक्षम को आरक्षण मिलेगा.

कैबिनेट की बैठक के बाद सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव डाॅ धर्मेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि पूर्व में सिर्फ सबॉर्डिनेट (अधिनस्थ) न्यायिक सेवा में आरक्षण का प्रावधान था.

डॉ. धर्मेंद्र सिंह गंगवार ने यह भी जानकारी दी कि इन चारों श्रेणियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत और अस्थि विकलांग उम्मीदवारों के लिए 1 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया गया है। एक और फैसले में बिहार कैबिनेट ने भारतीय सेना में शहीद हुए जवानों के परिवार वालों को मुआवजे के तौर पर 11 लाख रुपये की राशि देने का प्रस्ताव पास किया है।गौरतलब है कि पहले मुआवजे की राशि महज 5 लाख रुपये थी।


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