आर्थिक मोर्चे पर फ़ैल हो चुकी मोदी सरकार को अब अपनी ही पार्टी के नेताओं ने घेरना शुरू कर दिया है. पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के बाद अब पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने गंभीर सवाल उठाए है.

एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने नोटबंदी एक बड़ी मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम करार देते हुए कहा कि इसके तहत बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद किया गया. जिसका प्रमाण खुद आरबीआई ने यह कहकर दिया है कि नोटबंदी के दौरान 99 फीसदी पुराने नोट बैंकों में जमा किए गए.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा कि पीएम मोदी को एक दिन यह ज्ञान होता है कि नोटबंदी की जानी चाहिए और वह कर देते हैं. यदि यह बहादुरी वाला कदम था. तो मैं आपको याद दिला दूं कि आत्महत्या करना भी बहादुरी भरा फैसला ही होता है.

उन्होंने कहा कि देश इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा है और यह संकट नासमझी में लिए गए जीएसटी के फैसले से पैदा हुआ है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इसे लागू करने में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि इंफोसिस को जीएसटी सॉफ़्टवेयर का ट्रायल नहीं करने दिया गया. जीएसटी का फॉर्म बहुत जटिल है और इसके डिजाइन में कई बड़ी खामियां हैं.

उन्होंने कहा कि जीएसटी को लेकर सरकार को तीन महीने में सात बार नियम बदलने पड़े. जीएसटी का सीधा असर छोटे और मझोले उद्योगों पर पड़ रहा है. इससे उद्योगों के उत्पादों की बिक्री तथा उनकी आमदनी में गिरावट आई है. सरकार के कामकाज पर कटाक्ष करते हुए अरुण शौरी ने कहा कि वर्तमान सरकार का फोकस सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट पर है. सिर्फ बड़े-बड़े दावों के लिए बड़े-बड़े आयोजन किए जाते हैं. ढाई लोग ही पूरी सरकार चला रहे हैं. किसी को भी यहां सुना नहीं जाता है.

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