गुजरात विधानसभा चुनाव में सॉफ्ट हिंदुत्व की कांग्रेस की राजनीति पर कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने कहा कि  कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने की धारणा तोड़ना जरुरी था.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, गहलोत ने कहा कि ‘..और क्योंकि कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता को आधार मान कर चली है हमेशा, तो एक मैसेज तैयार किया देश को कि हम सब धर्मों को लेकर चलना चाहते हैं देश के हित में. उस परसेप्शन को उन्होंने मिसयूज किया बीजेपी ने- कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी बन गई है. कांग्रेस मुसलमानों को तरजीह दे रही है औऱ ये बात हिंदुओं को दिमाग में आ गई है कंट्री के अंदर. राम मंदिरके नाम पे आ गई थी.. आज से 20-25 साल पहले… यात्रा निकाली गई थी.. गांव-गांव के अंदर.. पैसे इकट्ठे किए गए थे.. ऐसे माहौल बन गया कंट्री के अंदर.’

उन्होंने कहा, ‘हिन्दू सोसायटी में एक ग़लतफ़हमी पैदा करने में ये कामयाब हो गए कि कांग्रेस का मतलब है मुसलमान और बीजेपी का मतलब है हिन्दू. उस चक्कर के अंदर ये देश चल रहा था. और चल रहा है काफी हद तक… जो भावना बनी हुई है लोगों की और जो दिमाग में घुसी हुई है , उसको देश के हित में निकलाना जरुरी है. और नहीं निकालेंगे तो आने वाले वक्त में तकलीफ होगी, पुरे मुल्क को तकलीफ होगी.

इस दौरान गहलोत ने यह भी माना कि मणिशंकर अय्यर के नीच वाले बयान और कपिल सिब्बल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मामले को जुलाई 2019 तक टालने की बात से नरेंद्र मोदी को गुजरात चुनाव में मुद्दों को भटकाने का मौका मिल गया.

उन्होंने कहा कि सिब्बल का बयान कांग्रेस का नहीं था. कांग्रेस ने उन्हें कोई ब्रीफिंग नहीं दिया था वह कांग्रेस के वकील नहीं थे. इसके बावजूद, हमारे लिए दुर्भाग्य था कि उन्होंने उस बयान से लाभ उठाया.

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