कथित गौरक्षा के नाम पर ली जा रही लोगो की जान के बीच एनसीपी नेता ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को चुनोती देते हुए कहा कि हिन्दू धर्मग्रन्थो के अनुसार गौमांस खाना जायज हैं और वे इसे साबित करने के लिए चर्चा करने को भी तैयार हैं.

राकांपा नेता डीपी त्रिपाठी का कहना हैं कि गोरक्षा के नाम पर हो रही ज्यादतियों के खिलाफ कांग्रेस और अन्य सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को कदम उठाना चाहिए. उन्होंने कहा, देश में गोरक्षा के नाम पर संघ परिवार द्वारा जो माहौल बनाया जा रहा है, वैसे में तो अटल बिहारी वाजपेयी, स्वामी विवेकानंद और वीर सावरकर को भी जेल में डाल दिया जाता.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में त्रिपाठी ने कहा, ‘मुझे उनके साथ भोजन का अवसर मिला है, वे क्या खाते थे मुझे पता है. वे अपने साक्षात्कारों में भी बता चुके हैं.’ स्वामी विवेकानंद पर पुस्तक ‘मॉर्डन मांक’ का हवाला देते हुए कहा कि विवेकानंद मांसाहार करते थे और उनका रसोइया अच्छा कबाब बनाता था.

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राज्यसभा सदस्य त्रिपाठी ने कहा, ‘वेदों में कहीं नहीं लिखा कि गोमांस खाना अपराध है. शास्त्रों में, वेदों में यह कहीं नहीं लिखा. मैं भागवत या उनके किसी भी प्रतिनिधि को सभी हिंदू ग्रंथों के आधार पर चर्चा करने की चुनौती देता हूं.’ त्रिपाठी ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी द्वारा गोहत्या पर कानून लाया गया संशोधन राष्ट्रविरोधी है और ऐसे मुख्यमंत्री को गिरफ्तार कर जेल में डाल देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि गुजरात इस तरह का बेरहम कानून पारित करने वाला पहला राज्य है. यह आदिवासियों, मुसलिम, दलित और अल्पसंख्यक लोगों के अधिकारों का हनन है, जबकि गोमांस उत्पादन में गुजरात, उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर है.

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