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कोलकाता: ‘तीन तलाक’ के मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को निशाने पर लेते हुए विदेश राज्यमंत्री एम. जे. अकबर ने शनिवार को कहा कि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सिर्फ ‘मेल पर्सनल लॉ बोर्ड’ बन गया है.

उन्होंने आगे कहा कि देश में 16-17वीं सदी की मानसिकता को बदल कर 21वीं सदी में लाने की जरूरत है. इसकी पहली शर्त है स्त्री-पुरुष में संविधान व व्यवहार में समान अधिकार का होना. आधी आबादी को बराबरी के अधिकार से वंचित रखना सही नहीं है.  बात यदि तीन तलाक के मुद्दे का हो, तो इसलाम में लैंगिक समानता की बात है न कि लैंगिक उत्पीड़न का? इसलाम ने कभी भी महिलाओं के उत्पीड़न की बात नहीं की है.

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उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ‘तीन तलाक’ को हटाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि मुसलिम समुदाय में शादी करते हुए आपको महिला से अनुमति की जरूरत होती है, तो फिर तलाक के दौरान पुरुष ही  क्यों शर्त तय करे? अगर देश और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना है, तो हमें महिलाओं  को साथ लेकर चलने की जरूरत है.

अकबर ने आगे कहा कि अगर देश को आगे बढ़ना है और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ना है तो हमें महिलाओं को साथ लेकर चलने की जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘भारत और उसकी अर्थव्यवस्था कभी आगे नहीं बढ़ेगी अगर आप महिलाओं को पीछे रखना चाहते हैं. महिला हमारी आबादी का लगभग 50 प्रतिशत हैं और हम सभी को मिलकर आगे बढ़ना होगा. ‘

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