लखनऊ | उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावो के लिए मुस्लिम वोटो का धुर्विकरण रोकने के लिए समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से गठबंधन किया है. समाजवादी पार्टी को डर था की अगर कुछ फीसदी भी मुस्लिम वोट कांग्रेस की तरफ आकर्षित हो गया तो सूबे में दोबारा सरकार बनाने की उनकी उम्मीदो को झटका लग सकता है. दोनों पार्टियों के साथ ने बीजेपी और बसपा की बैचैनी बढ़ा दी है.

लेकिन मंगलवार को कुछ मुस्लिम संगठनो ने अखिलेश सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी का इजहार करते हुए बसपा को समर्थन करने का फैसला किया. जो समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. मुत्ताहिदा मिल्ली मजलिस के बैनर तले कुछ मुस्लिम संगठनो ने सपा-कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ वोट करने की अपील की. इन संगठनों ने अखिलेश सरकार पर आरोप लगाया की उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मुसलमानों की बेहतरी के लिए कोई काम नही किया.

मजलिस के मुखिया मुफ्ती एजाज अरशद कासमी और आरिफ कासमी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा की 2012 में समाजवादी पार्टी ने मुसलमानों से झूठे वादे कर वोट लिया , लेकिन सरकार बनने के बाद उन्होंने अपना कोई भी वादा नही निभाया. न ही उन्होंने मुस्लिमो को आरक्षण का लाभ दिया और न ही वो मुसलमानों की सुरक्षा कर सके. मुजफ्फरनगर दंगो के दौरान उनका शासन पूरी तरह से बेअसर साबित हुआ.

अरशद कासमी ने मुसलमानों से बसपा को वोट करने की अपील करते हुए कहा की हमारे पास प्रदेश में बसपा का विकल्प मौजूद है. उनके समय में प्रदेश में कोई दंगा नही हुआ इसलिए समाजवादी पार्टी की जगह बसपा को वोट करे. हालाँकि दोनों ही नेताओं की बीजेपी से नजदीकी किसी से छिपी नही है. जानकारों का मानना है की समाजवादी और कांग्रेस गठबंधन की हवा निकालने के लिए बीजेपी की यह नई चाल है.


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