ट्रिपल तलाक मामले में देश की सर्व्वोच अदालत ने अपना फैसला देते हुए तीन तलाक को असंवेधानिक करार दिया. साथ ही केंद्र सरकार को 6 महीने में कानून बनाने का आदेश दिया.

इस मामले को लेकर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल)  की प्रतिक्रिया सामने आई है. आईयूएमएल के वरिष्ठ नेता और मलाप्पुरम से लोकसभा सदस्य पी.के. कुन्हालिकुट्टी ने कहा कि मोदी सरकार को इस सबंध में अध्यादेश लाने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए.

कुन्हालिकुट्टी ने कहा, “संसद को इस मुद्दे पर बहस और चर्चा करनी चाहिए..इसके लिए छह महीने का समय है.” दरअसल, मंगलवार को दो के मुकाबले तीन मतों से फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की संवेधानिक बैंच ने कहा कि तीन तलाक को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त नहीं है.

हालांकि चीफ जस्टिस जे.एस. खेहर और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर ने कहा कि तीन तलाक इस्लामिक रीति-रिवाजों का अभिन्न हिस्सा है और इसे संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है.

वहीँ जस्टिस कुरियन जोसफ, जस्टिस रोहिंगटन फली नरीमन और जस्टिस उमेश ललित ने कहा कि तीन तलाक इस्लाम का मौलिक रूप से हिस्सा नहीं है, यह कानूनी रूप से प्रतिबंधित है और इसे शरीयत से भी मंजूरी नहीं है.

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