देश की पहले और दुसरे की स्थान की क्रमश अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के नामों में कोई परिवर्तन नहीं होगा. इस बात की जानकारी खुद केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने दी है.

दरअसल, यूजीसी की और से गठित एक समिति ने अपनी सिफारिश में मानव संसाधन विकास मंत्रालय से इन दोनों यूनिवर्सिटी के नामों में से ‘मुस्लिम’ और हिन्दु शब्द हटाने की बात कही. समिति का कहना है कि ये शब्द इन विश्वविद्यालयों की धर्मनिरपेक्ष छवि को परिलक्षित नहीं करते.

समिति ने सिफारिश की है की एएमयू का नाम बदलकर या तो अलीगढ यूनिवर्सिटी कर दिया जाए या फिर इसका नाम यूनिवर्सिटी के संस्‍थापक सर सैयद अहमद खान के नाम पर रख दिया जाए. इसके अलावा बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी का बनारस यूनिवर्सिटी या काशी विश्वविद्यालय रख दिया जाए.

नकवी ने कहा कि ये दोनों विश्वविद्यालय दशकों पुराने हैं. इनके नाम बदलने का सरकार का कोई इरादा नहीं है. इनके नाम से हिन्दू और मुस्लिम शब्द नहीं हटाए जाएंगे.’

वहीँ दोनों यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों का कहना है कि यूजीसी को यूनिवर्सिटीज के नाम बदलने की बजाय कुछ नए कोर्स या अन्य अच्छे काम करने चाहिए.

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