मुलायम ने रोकर लगाई थी गठबंधन करने की गुहार-जयंत चौधरी

11:36 am Published by:-Hindi News

मथुरा | पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रिय लोकदल का प्रभाव करीब 30 सीटो पर माना जाता है. जाट लैंड के नाम से मशहूर यह क्षेत्र ज्यादातर चुनाव में रालोद को वोट करता आया है. यही कारण था की समाजवादी पार्टी , कांग्रेस के अलावा रालोद से भी गठबंधन करने के लिए लालियत थी. उस समय अखिलेश यादव का मानना था की अगर तीनो दल एक हो जाये तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बाकी पार्टियों का सफाया हो जायेगा.

लेकिन मुजफ्फरनगर दंगो में जाटो-मुस्लिमो के बीच हुए संघर्ष की वजह से अखिलेश यादव को रालोद से दुरी बनानी पड़ी. अखिलेश को डर था की कही रालोद की वजह से मुस्लिम मतदाता सपा से छिटककर बसपा की झोली में न जा गिरे. अब चुनाव सर पर है और समाजवादी-कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ रहे है जबकि रालोद अलग से मैदान में ताल ठोक रही है.

हालाँकि समाजवादी और कांग्रेस के साथ गठबंधन न होने की टीस आज भी रालोद के महासचिव जयंत चौधरी के मन में है. उन्होंने इसको मथुरा में पत्रकारों से बात करते हुए उजागर भी किया. गठबंधन पर उन्होंने कहा की निश्चित तौर पर हम गठबंधन में शामिल होना चाहते थे क्योकि अगर कोई रोकर आपसे निवेदन करे तो आप उसको मना नही कर सकते. गठबंधन के लिए मुलायम ने फोन पर रोकर गुहार लगायी थी जिसके बाद ही चौधरी साहब (अजित सिंह) गठबंधन के लिए तैयार हुए. उन्होंने केवल दो मिनट में गठबंधन पर फैसला किया.

मथुरा के पूर्व सांसद जयंत ने कहा की समाजवादी-कांग्रेस गठबंधन ने हम पर लाठी मारी है, लेकिन हम कमजोर नही हुए बल्कि और मजबूत होकर उभरे है , हम इस लाठी को तोड़ देंगे. मथुरा में रालोद प्रत्याशी अशोक अग्रवाल के पक्ष में चुनाव प्रचार करने पहुंचे जयंत ने अखिलेश के वादों पर चुटकी लेते हुए कहा की 600 मीटर मेट्रो चला देना और उसका प्रचार करना विकास नही होता.

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