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नई दिल्ली: नोटबंदी के सबंध में आरबीआई की और से जारी रिपोर्ट सामने आने के बाद मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए कांग्रेस नेता मुहम्मद उमर कासमी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की गरीब जनता को मूर्ख बनाकर नोटबंदी के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लूट लिया।

उन्होने कहा कि बंद किए गए 500 और 1,000 रुपये के नोटों का 99.3 प्रतिशत बैंको के पास वापस आ जाना साबित करता है कि नोटबंदी पूरी तरह से फ़ेल हुई। कासमी ने बताया कि बंद नोटों में सिर्फ 10,720 करोड़ रुपये ही बैंकों के पास वापस नहीं आए हैं। लेकिन इसके उलट आरबीआई ने 2016-17 में रिजर्व बैंक ने 500 और 2,000 रुपये के नए नोटों की छपाई पर 7,965 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा 2017-18 (जुलाई 2017 से जून 2018) के दौरान नोटों की छपाई पर 4,912 करोड़ रुपये और खर्च किए गए। यानि 2157 करोड़ का नुकसान अलग झेलना पड़ा। साथ ही करोड़ों के एटीएम को दुरुस्त करने और अन्य खर्च अलग है।

कासमी ने नोटबंदी को देश का सबसे बड़ा घोटाला करार देते हुए कहा कि यह योजना इसलिए लाई गई थी कि काला धन रखने वाले अपने काले धन को गुपचुप सफेद धन में परिवर्तित कर लें। उन्होने कहा कि पीएम ने लाल किले से कहा था तीन लाख करोड़ काला धन है। साथ ही ‘‘नोटबंदी के समय प्रधानमंत्री ने तीन मकसद बताए थे। पहला यह कि आतंकवाद पर चोट लगेगी, दूसरा यह कि जाली मुद्रा पर अंकुश लगेगा और तीसरा यह कि कालाधन वापस आएगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

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कांग्रेस नेता ने कहा कि आतंकवाद से कश्मीर जल रहा है। तो दूसरी और नकली नोट पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने चेतावनी जारी कर चुका है। एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि 500 (4,178 प्रतिशत की बढ़ोतरी) और 2000 (2,710 प्रतिशत की बढ़ोतरी) के नकली नोटों में भारी इजाफा हुआ है।’ इसके अलावा रही तीन लाख करोड़ के काले धन के वापस आने की बात वह आरबीआई रिपोर्ट में सामने आ गई।

उन्होने ये भी कहा कि नोटबंदी की वजह से अर्थव्यवस्था को जीडीपी के 1.5 फीसदी का नुकसान हुआ। इस हिसाब से एक साल में 2.25 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी। इसके अलावा कतारों में खड़े होने की वजह से 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई। लाखों लोग बेरोजगार हो गए। उन्होने कहा कि अगर प्रधानमंत्री में रत्ती भर भी नैतिकता बची है तो अपने पद इस्तीफा दें दें।

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